Priority of conduct : आचरण की प्रधानता 

Priority of conduct :

आचरण की प्रधानता

 

प्रकृति ने मनुष्य को केवल मनुष्य नहीं बनाया अपितु उसके आचरण पर छोड़ दिया कि वह केवल मनुष्य रहना चाहता है या अपने आचरण को गिराकर पशु बनना चाहता है अथवा अपने आचरण को उठाकर देवता बनना चाहता है। पशु केवल पशु है लेकिन एक मनुष्य केवल मनुष्य नहीं है। वह मनुष्य भी है, देवता भी है और उसके साथ-साथ एक पशु भी है।

हमारे शास्त्रों ने बताया कि एक ही माँ के गर्भ से जन्म लेने पर कोई देवता बन गया, कोई असुर बन गया तो कोई पशु-पक्षी बन गया अर्थात् जिसने जिस आचरण का पालन किया वो वही बन गया। आपको जो कुछ भी बनना है यह कोई और नहीं अपितु आपका आचरण निर्धारित करेगा। सामान्य आचरण आपको मनुष्य बना देगा, निकृष्ट आचरण आपको पशु बना देगा तो आपका उत्कृष्ट एवं श्रेष्ठ आचरण आपको देवता भी बना देता है।

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