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Power of faith and devotion श्रद्धा और भक्ति के बल पर ही प्राप्त किया जा सकता है भगवान को

Chhattisgarh NewsPower of faith and devotion श्रद्धा और भक्ति के बल पर ही प्राप्त किया जा सकता है भगवान को

Power of faith and devotion श्रद्धा और भक्ति के बल पर ही प्राप्त किया जा सकता है भगवान को

Power of faith and devotion श्रद्धा और भक्ति के बल पर ही प्राप्त किया जा सकता है भगवान को

Power of faith and devotion सक्ती । भगवान सदैव अपने भक्त के वशीभूत होते है , भक्ति में बड़ी शक्ति होती है । एक भक्त ही भगवान को सातवें आसमान से भी नीचे उतार सकता है l भगवान को लौकिक डोरी से बांधना या पाना संभव नहीं है उन्हें तो केवल अपनी श्रद्धा और भक्ति के बल पर ही प्राप्त किया जा सकता है ।

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दृढ़ संकल्प कर लेने पर कठिन से कठिन कार्य भी सिद्ध हो जाते हैं 5 वर्ष के भक्त बालक ध्रुव ने अपनी भक्ति के बल पर ही भगवान से दिव्य वरदान प्राप्त कर लिया था ,ये बाते शक्ति नगर के हृदय स्थल हटरी चौक में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन की भागवत कथा कहते हुए व्यासपीठ से आचार्य राजेंद्र महाराज ने कहा

Power of faith and devotion  आचार्य ने बताया कि हमारे जीवन में 24 के अंक की बड़ी महत्ता होती है , भगवान श्री नारायण के 24 अवतार भागवत में वर्णित है , भागवत भगवान के अवतारों का इतिहास है , वह अजन्मा होकर के भी संपूर्ण प्राणियों के कल्याण करने के लिए अवतार लिया करते हैं । इस संसार के उत्पत्ति पालन और संहार उन्हीं के हाथों में है !

Power of faith and devotion  उनके रहने के लिए इस संसार का होना नहीं होना यह मायने नहीं रखता । श्रीमद् भागवत कथा मनुष्य के जीवन के लिए शांति है तो पूरे समाज के लिए एक अध्यात्मिक क्रांति भी है ।

भगवान श्री कृष्ण के स्वर धाम गमन करने के 30 वर्ष व्यतीत होने पर इस धरती में पहली बार श्रीमद्भागवत की कथा शुकदेव जी महाराज के मुखारविंद से प्रवाहित हुई और इस सत्कर्म के यजमान बने राजा परीक्षित , तब से यह ज्ञान गंगा और कथामृत की रस धारा आज पर्यंत भी प्रवाहित हो रही है ।

Power of faith and devotion पुराणों में इसे सरिता अर्थात प्रवाहित ज्ञान गंगा कहा है जिस प्रकार नदी में कोई घाट नहीं होती उसी प्रकार भागवत में प्रवेश करने का भी कोई दिन निश्चित नहीं होता ।

आचार्य राजेंद्र जी महाराज के द्वारा दूसरे दिन की कथा में शुकदेव जी का प्राकट्य , परीक्षित जन्म और उन्हें श्रृंगी ऋषि का श्राप , सृष्टि वर्णन तथा ध्रुव चरित्र की कथा का सरस वर्णन किया गया ।

भागवत कथा में संगीत दल के आचार्यों के द्वारा मधुर संगीत एवं आचार्य देव कृष्ण जी महाराज एवं उपाचार्य के द्वारा स्वर वेद मंत्रोच्चार कर पाठ एवं वेदी पूजन संपन्न किया जा रहा है ।

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नगर एवं दूरस्थ ग्रामों से आए कथा श्रोताओं को प्रतिदिन कथा रस पान के साथ मधुर संगीत , प्रेरणास्पद दृष्टांत एवं जीवंत झांकियों का दर्शन लाभ प्राप्त भागवत कथा सुनकर पुण्य का लाभ उठा रहे हैं

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