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टिकट को लेकर सियासी पंडितों ने गड़ा दी अपनी निगाहें : पूर्व मंत्री विजय मिश्रा के बहाने ब्राम्हणों को रिझाएगी भाजपा

टिकट को लेकर सियासी पंडितों ने गड़ा दी अपनी निगाहें : पूर्व मंत्री विजय मिश्रा के बहाने ब्राम्हणों को रिझाएगी भाजपा

 गाजीपुर । सदर विधानसभा से समाजवादी पार्टी की टिकट पर 2012 में विधायक एवं अखिलेश सरकार में मंत्री रहे विजय मिश्रा अचानक रविवार को जब बसपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए तो हर कोई हैरान था। किसी को उम्मीद नहीं थी कि विजय बसपा भी छोड़ेंगे। अब भाजपाई हो चुके विजय मिश्रा को लेकर यह चर्चा है कि वह सदर या देवरिया जिले की किसी एक विधानसभा सीट से विजय अपना भाग्य आजमा सकते हैं।

हालांकि विजय मिश्रा ने टिकट के सवाल पर टोकते हुए कहते हैं कि पार्टी मुझे जो भी जिम्मेदारी देगी, उसका पालन करूंगा। वैसे पूरे यूपी के चप्पे चप्पे पर कमल निशान ही 2022 में दिखाई देगा।

मुलायम सिंह के बेहद करीबी पंडित अचुतानंद मिश्रा के भतीजे विजय मिश्रा ने 2012 में सियासत में कदम रखते हुए सदर विधानसभा से भाग्य आजमाया था। भाग्य ने साथ दिया और वह कम वोटों के अंतर से विधायक बन गए। विधायक बनने के बाद उन्हें अखिलेश मंत्रिमंडल में जगह मिली और वह मंत्री बने। उन्होंने साढ़े चार वर्षों तक खूब विकास की बैटिंग की और सदर विधानसभा में मेडिकल कालेज से लेकर जिला अस्पताल के नए भवन की नींव रखी।

यही नहीं स्टेडियम का भी शिलान्यास किया। इधर चाचा भतीजे में खटपट होने के बाद अखिलेश यादव ने ओमप्रकाश सिंह, शादाब फातिमा सहित करीब आधा दर्जन मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया। किसी ने अखिलेश से भी विजय मिश्रा की शिकायत की थी। इसके बाद सियासी भविष्य को भांपते हुए उन्होंने 2017 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सपा छोड़कर बसपा का दामन थाम लिया।

हालांकि उन्होंने सदर विधानसभा सीट से चुनाव नहीं लड़ा। इधर वह बसपा में पूरी तरह से सक्रिय रहे। उन्होंने जिले में ब्राम्हण सम्मेलन भी कराया। जिसमें बसपा के सतीश चंद मिश्रा भी आए थे। वह सतीश चंद मिश्रा के बेहद करीबी भी हो गए। सियासी पंडित उनका टिकट सदर विधानसभा से पूरी तरह से पक्का मानकर चल रहे थे। यहां से बसपा में राजकुमार गौतम भी टिकट मांग रहे थे। अब राजकुमार गौतम के लिए लाइन पूरी तरह से क्लीयर हो चुकी है।

अचानक विजय मिश्रा ने रविवार को भाजपा के प्रदेश कार्यालय पर पहुंचकर प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह, डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा सहित कई नेताओं की मौजूदगी में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि हर तरफ सिर्फ भाजपा ही दिखाई दे रही है। हम लोग पूरे पूर्वांचल में भाजपा को मजबूत करेंगे। उन्हें भाजपा ब्राम्हण चेहरा के रूप में पेश करेगी।

विजय मिश्रा के भाजपा में आने के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि उन्हें सदर से उम्मीदवार बनाया जा सकता है। जबकि इस सीट से सहकारिता राज्यमंत्री संगीता बलवंत भी मजबूत दावेदार के रूप में पेश की जा रही हैं। विजय मिश्रा के भाजपा में आने के बाद सदर सीट पर टिकट को लेकर सियासी पंडितों ने अपनी निगाहें गड़ा दी हैं।