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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - बहार आने से पहले ख़्हिज़ाँ चली आई

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - बहार आने से पहले  ख़्हिज़ाँ चली आई

 - सुभाष मिश्र

हमारी जीजिविषा हमें बुरे से बुरे हालात में जीने के लिए प्रेरित करती है। पिछले दो साल से लगातार कोरोना संक्रमण झेल रहे दुनिया भर के लोगों को धीरे-धीरे फिर से अपनी जीवन चर्या को कामकाज को रेगुलर करना शुरू ही किया था कि कोरोना की धमाकेदार एंट्री तीसरी लहर के रूप में हो चुकी है। एक फिल्मी गाना है कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर के आने के बाद ही अनायास लोगों की जुबां पर आने लगा है जुबां पे दर्द भरी दास्तां चली आई, बहार आने से पहले  ख़्हिज़ाँ चली आई। फरवरी 2020 से डरा रहा कोरोना संक्रमण समय के साथ धीरे-धीरे खतरनाक होता गया।  दूसरी लहर के दौरान पूरे देश में व्यवस्थाओं की अफरा-तफरी और मौत का तांडव देखने वाले लोगों को इधर के तीन महीने में थोड़ी राहत महसूस हो रही थी।  

लोगों का आशावादी नजरिया और बेपरवाह और लापरवाह होती जीवनचर्या में सुनामी की तरह आ रही कोरोना की तीसरी लहर ने रोक लगाना शुरू कर दिया। इस बार यह अपने साथ एक नया ओमीक्रॉन वैरियंट को साथ लाया है जिसकी फैलने की रफ्तार पहले से ज्यादा है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैंसर इंस्टिट्यूट कैंपस के उद्घाटन  अवसर पर कहा है कि ये भेष बदलने वाला कोरोना वायरस है। पिछले सौ सालो की सबसे बड़ी महामारी है। कोरोना के नए वैरियंट से सतर्क रहने की जरूरत है। यह दुनिया की स्वास्थ्य व्यवस्था को खराब कर रहा है।  

कोरोना की पहली और दूसरी लहर से बहुत अधिक तेजी से तीसरी लहर किसी सुनामी की तरह फ़ैल रही है। अभी तक देश में भारत में ओमिक्रॉन केसों का आंकड़ा 3,007 हुआ, अब तक ठीक हो चुके 1,199 मरीज़। इस बीच डेनमार्क की एक एक्सपर्ट टायरा ने दावा किया है कि ओमिक्रॉन के बाद कोरोना खत्म हो जाएगा। टायरा के अनुसार ओमिक्रॉन के लक्षण बहुत ही माइल्ड हैं। ओमिक्रॉन बहुत ही तेज़ी से फैलता है, जनवरी के अंतिम दिनों में इसका प्रभाव बहुत ज़्यादा होगा, मगर फरवरी में इसका असर कम होगा। कोविड-19 के नए मामलों में जबरदस्त तेजी आई है। देशभर में इसके मरीज बढ़ रहे हैं। देश में कोरोना से जान गंवाने वालों का कुल आंकड़ा 4,82,876 पर पहुंच गया है।  देश में एक बार फिर कोविड संक्रमितों की संख्या 1 लाख के पार हो गई हो।

एक तरफ कोरोना हमारे सामने एक नए रूप में सामने आ चुका है। वो तेजी से अपना पैर पसार रहा है। हमने पिछले दो सालों में कोरोना की भयावता को बेहद करीब से महसूस किया है। हममें से कईयों ने इस महामारी में अपनों को खोया है। करोड़ों लोग इससे बीमार हुए हैं। अरबों रुपए के बाजार और कारोबार तबाह हो चुके हैं। बावजूद इसके हम कोरोना को लेकर लापरवाह है और ये हर स्तर पर नजर आ रही है। आज भी लोग सोशल डिस्टेंसिंग जैसी छोटी सी बात को समझ नहीं पा रहे हैं जबकि यही इस वायरस से बचने का सबसे कारगर तरीका है. कोविड के बढ़ते खतरे के बाद भी सरकारी और निजी आयोजनों में किसी तरह की कमी नजर नहीं आ रही है। जब विश्व स्वास्थ्य संगठन ने नवंबर में ही कोरोना की तीसरी लहर को लेकर आशंका जताई थी, उसके बाद भी हम पूरा नवंबर और दिसंबर माह इसको लेकर किसी तरह के सतर्क नहीं होते हैं। नवंबर माह में डब्ल्यूएचओ ने कोरोना को लेकर कहा था कि फरवरी तक यूरोप में 5 लाख लोगों की मौत हो सकती है। हमारे देश और यूरोप के बीच बेहद घनिष्ठ रिश्ते हैं हर रोज यहां से हजारों लोग आना जाना करते हैं। पहले भी भारत में कोविड ने यूरोप से ही प्रवेश किया है ऐसे में डब्ल्यूएचओ के अनुमानों को लेकर उदासीन रहना दुर्भाग्यजनक है।

कोविड के बढ़ते कदम को लेकर कुछ तथ्यों पर नजर डालते हैं। नवंबर माह में डब्ल्यूएचओ ने कोरोना को लेकर कहा था कि फरवरी तक यूरोप में 5 लाख लोगों की मौत हो सकती है। भारत में भी कई विशेषज्ञ जनवरी  माह के अंतिम और फरवरी माह के शुरूआती ही सप्ताह कोरोना के मामले में भारी वृद्धि का संकेत दे रहे हैं। डब्ल्यूएचओ का अनुमान है दुनिया के लगभग हर क्षेत्र में ओमीक्रॉन फ़ैल चूका है।  भले इससे संक्रमित गंभीर रूप से से बीमार नहीं हो रहे हैं लेकिन इसकी रफ़्तार स्वास्थ्य सुविधाओं वह व्यवस्थित दवाब बना सकता है। ओमीक्रॉन के चलते दुनिया भर में 3 हजार से ज्यादा विमान रद्द हो चुके है। आईआईटी कानपुर की स्टडी कहती है भारत में 3 फरवरी तक ओमीक्रोन के वैरियंट आ सकता है। कोविड के बढ़ते मामलों के बीच छत्तीसगढ़ में बेहद तेजी से 15 साल से अधिक आयुवर्ग के किशोरों का टीकाकरण हो रहा है इससे उम्मीद की एक किरण दिखाई पड़ती है कि इस बार कोरोना को भयावह रूप नहीं लेने दिया जाएगा। सरकार की तैयारियों के बीच हमें भी सावधानी और नियमों के प्रति ईमानदारी बरतने की जरूरत है।