breaking news New

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से-निजता को भंग करने का बाज़ार

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से-निजता को भंग करने का बाज़ार

हरेक को दूसरे की निजता में दिलचस्पी होती है, और अपनी निजता के उल्लंघन पर एतराज़ होता है। दरअसल निजता का सम्मान समझ की प्रौढ़ता से आता है। समय के साथ निजता और नैतिकता के मूल्य ध्वस्त होते गए है, बल्कि नए सिरे से परिभाषित किये जा रहे हैं। मर्यादा के दायरे टूटे हैं और समाज अधिक उन्मुक्त हुआ हैं। अखबार, पत्रिकाएं, टीवी, रेडियो और ओटीटी प्लेटफार्म पर इस नंगेपन के पैरोकार आ गए है। अब आपसी संवादों में खुलकर वर्जित शब्दों का, विषयो का आदान-प्रदान हो रहा है, और हर वो चीज़, वो विषय जिसमें इन्द्रिय तत्व है उस पर खुलकर चर्चा होने लग गयी है। जिसमें भी सनसनी हैं,चटखारापन है, वो बिकाऊ है। पिछले सालों में यह बात चर्चा में थी की सिनेमा में या तो सेक्स बिकता है या शाहरुख खान। उसके बाद द डर्टी पिक्चर के साथ एक नया दौर आया जिसमे कहा गया की सिनेमा में सिर्फ एंटरटेनमेंट, एंटरटेनमेंट, एंटरटेनमेंट बिकता है। इसके पहले जो कुछ निजी शयन कक्ष तक सीमित था, वह अब वो जन-जन के कक्ष तक पहुंच रहा है। मीडिया कुत्सित लंपटता को बेच रहा है। लोग अकेले या अपने साथी के साथ कैमरे के समक्ष निर्वस्त्र ही नहीं हो रहे, बल्कि तमाम कामुक चेष्टाएँ कर पैसे कमा रहे है। उन्हें लगता है शरीर को एक दुकान की तरह सजा कर एक विशाल दर्शक वर्ग की यौन लालसाओं, लिप्साओं को तृप्त कर पैसे कमाने में हजऱ् ही क्या हैं। दुनिया के कई बड़े अखबार, पत्रिकाएं और टीवी चैनल प्रसिद्ध लोगों की जिन्दगी के नितांत निजी क्षणो की तस्वीरें हासिल कर कमाई करना चाहते है। दुनिया भर को नैतिकता की सीख देने वाला मीडिया न जाने कितनी बार ऐसी खबरों से समझौता कर रहा है। ऐसी क्या वजह है कि जिस देश में कामसूत्र जैसे ग्रंथ लिखा गया, जहां के खजुराहों और भोरमदेव मंदिर में मैथुन मूर्तियों स्थापित की गई है।

निजता मनुष्य के अस्तित्व का अभिन्न अंग है, लेकिन इन दिनों जैसे-जैसे तकनीक ने अपने पांव पसारे हैं, वैसे-वैसे इंसान की प्रायवेसी खतरे में पड़ती जा रही है। मसलन आज हर हाथ में कैमरायुक्त फोन है जिसके कई फायदे हैं, तो इसके गलत इस्तेमाल भी हो रहे हैं। ज्यादातर लोगों को इस बात का भान ही नहीं है कि वे किसी के अंतरंग तस्वीर कैमरे में कैद कर लेते हैं तो उसका किस स्तर पर गलत इस्तेमाल हो सकता है। किसी का निजी क्षण हो सकता है। कुछ लोगों को कुछ देर के लिए मजा दे लेकिन ये किसी की जिंदगी भी तबाह कर सकता है। लेकिन सोशल मीडिया में हिट के चक्कर में लोग आजकल धड़ल्ले से अपने या किसी और के निजी पलों को इंटरनेट पर अपलोड कर रहे हैं, ये बेहद घातक है। कहा जाता है कि सेक्स का नशा चरस से भी ज्यादा खतरनाक है। दुनिया भर में इसका बहुत बड़ा बाजार तैयार हो चुका है। यहां तक चाइल्ड पोर्नग्रॉफी का जाल छत्तीसगढ़ के कस्बाई इलाकों तक पहुंच गया है। इस काले कारोबार पर हाल ही में कुछ कार्रवाईयां भी हुई लेकिन अभी लगाम पूरी तरह कसना बाकी है, ऐसे में सबको सावधान रहने की जरूरत क्योंकि हम ऐसे बाजार में खड़े हैं। जहां निजता सबसे बिकाउ आइटम है।

आज नेट पर दुनिया का सबसे बड़ा कमाऊ बाजार पोर्न साइट्स का है और यहाँ कई लोग अपने यौन व्यवहार के वीडियोज़ अपलोड कर पैसे कमा रहे है। टेक्नोलॉजी ने निजता में खुल कर सेंध लगाई है। जगह-जगह लगे सुरक्षा कैमरों से सुरक्षा मजबूत तो हुई है लेकिन होटलो, कपड़ो की दुकानों में लगे कैमरों ने लोगो की निजता का उल्लंघन किया है। आप जैसे कही सुरक्षित नहीं जैसे कोई तीसरी आंख आपको गुपचुप तरीके से देख रही है, ऐसा आभास होता है। लोगो अपने स्मार्टफोन से अपने और अपनों के वीडियो बना तो लेते है लेकिन उन्हें अपने फोन या कंप्यूटर पर लापरवाही से खुला छोड़ देते है और जब ये जानकारी किसी ब्लैकमेलर के हाथ लग जाती है तो लेने के देने पड़ जाते है। बहुत बार आपसी संबंधों में कड़वाहट आने पर प्रेमी-प्रेमिका यहाँ तक पति भी पत्नी के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देता है। कई बार बदमाश व्यक्ति इस तरह के अंतरंग क्षणों के वीडियो को ब्लैकमेलिंग का हथियार बना लेता है। ऐसे समय में आगे रहने की इस अंधी दौड़ में मीडिया भी किसी की निजता का सौदा कर सकता है। ये बहुत डराने वाला तथ्य है। जिस मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है, वही अब लोगों के निजी पल दिखाने पर आमदा है। इससे पहले भी कुछ मॉडल और अभिनेत्रियों का एमएमएस को धड़ल्ले से प्रसारित किया गया। हाल ही में एक भोजपुरी फिल्मों की अभिनेत्री का एक वीडियो बेहद चर्चे में रहा है। निजता को बेचने की सनक ने ही ब्रिटेन की राजकुमारी डायना को काल के गाल का निवाला बना दिया था।

हमारे देश में अपनी बात ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की प्रवृत्ति बहुत ज्यादा है। इसीलिए तमाम सोशल मीडिया कंपनियों के लिए भारत सबसे बड़ा बाजार बन गया है। हमारे देश में कुछ लोग जहां दूसरे निजता पर अतिक्रमण कर अपना फायदा या मजा खोजते हैं। ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है जो चर्चा बटोरने के लिए इस तरह के स्टंट करते है। लोग का क्षणिक आनंद पाने की चाहत किसी की जिंदगी नरक बना सकती है, देश भर में ऐसे सैकड़ों मामले सामने आए हैं जब इस तरह एमएमएस वायरल होने के बाद लोगों ने लोक-लाज में खुदकुशी जैसा आत्मघाती कदम उठा लिए। ऐसे में मीडिया को भी सतर्क रहने की जरूरत है कहीं हम आगे निकलने की रफ्तार में कुछ ऐसा न कर जाएं जो किसी और के जीवन में जहर घोल दे।

कुछ निजता टेक्नोलॉजी के चलते भंग हो रही है तो कुछ निजता व्यक्ति स्वयं भंग कर रहा है। अपनी व्यक्तिगत छपास या दिखास की चाहत के चलते भी अब पीपीपी यानि पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप जैसा कुछ निजी जीवन में भी घटित होने लगा है। बहुत सारे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, वेबसाइट और मीडिया के अलग-अलग चैनलो पर इस समय निजी और एकांत के क्षण जिसमे सेक्स प्रमुख है, शेयर हो रहा है या किया जा रहा है। इधर पिछले दो दिनों से नवा रायपुर में किसी स्थान में दो उम्रदराज़ स्त्री-पुरुष एक गाड़ी में जिस पर लिखा था शासकीय कार्य में छत्तीसगढ़ शासन उसमें दो वयस्क अंतरंग स्थिति में पाए गए, जिसे किसी ने कैमरे में कैद कर लिया। इंसानी फितरत को देखते हुए कुछ अखबार और चैनल ने इसे मसालेदार खबर बनाकर लोगों के सामने परोस दिया। पता नहीं वे स्त्री-पुरुष कौन है, उनका सरकार से क्या लेना देना है, किन्तु वे दोनों आपसी सहमति से एक कार के भीतर अंतरगता प्रदर्शित कर रहे थे। अपने निजी क्षणों को शासकीय वाहन में सार्वजनिक जगह पर प्रदर्शित करना जितना जघन्य अपराध है, उससे भी कही ज्यादा घृणित यह भी है की उस वीडियो को जगह-जगह वायरल कर उसके मीम बनाये जाये। इस चर्चित वीडियों के बारे में पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह वीडियों नये रायपुर का नहीं है और एक साल पुराना है। तकनीकी का दुरूपयोग करके आज लोक किसी के साथ भी किसी का फोटो, वीडियों बनाकर वायरल कर सकते है। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद से इस तरह की घटनाएं आम हुई है। उस देश में लोग दूसरे के अंतरंग क्षणों को देखने के लिए लालयित है, उसकी कीमत चुकाने के लिए भी तैयार है। दरअसल पिछले कुछ साल में सेक्स को एक हौव्वा और बाजार की वस्तु की तरह पेश किया जा रहा है। दो वयस्क लोग आपसी सहमति से किसी बंद कमरे में जो उनका अपना स्पेस हो, कुछ भी करे यह समझ में आता है, किन्तु उस कमरे में किसी तरह का कैमरा लगाकर या धोखे से उसका वीडियो बनाकर उसे वायरल करना दरअसल उस मनोवृति का प्रतीक है जो हमारे भीतर सेक्स को लेकर सदियों से है।

हमारे देश की सर्वोच्च न्यायालय के 9 न्यायधीशों की पीठ ने 24 अगस्त 2017 को निजता के अधिकार के सम्बन्ध में ऐतिहासिक फैसला सुनते हुए इसे सविंधान के तहत मौलिक अधिकार घोषित किया है। न्यायधीशो ने यह भी कहा है की निजता मानव गरिमा का सवैंधानिक मूल है। दरअसल हमारे देश की सरकार बहुत बार देश की सुरक्षा और सम्प्रभुता के नाम पर टेलीफोन, मोबाइल, इंटरनेट, संचार डाटा और व्यक्तिगत बात पर निगरानी रखती है। कई बार इसका उपयोग विरोधियो को फसाने के लिए भी किया जाता है। यहाँ फसाने से ज्यादा सनसनी, मज़ा और ज्यादा से ज्यादा शेयरिंग कर टीआरपी, लाइक्स, हिट पाने का मामला ज्यादा है। ये व्यक्ति की निजता खास करके उसके अंतरंग और गोपन को बाजार में बेचने का समय है। इस समय का एक सूत्र वाक्य है - जो दिखता है, वो बिकता है।