breaking news New

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - देश के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है छत्तीसगढ़ मॉडल

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से -  देश के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है छत्तीसगढ़ मॉडल

-सुभाष मिश्र

गुजरात मॉडल की टक्कर में छत्तीसगढ़ मॉडल आगामी चुनाव में भाजपा ने अपनाया और बहुत हद तक सफल हुआ। वहीं कांग्रेस छत्तीसगढ़ मॉडल की ओर बढ़ रहा है।
दोनों के सोचने-समझने और काम करने के तौर-तरीके अलग हैं। एक पार्टी हिन्दुत्व का नारा लेकर चल रही है तो दूसरी धर्मनिरपेक्षता की, अपनी विरासत की बात करती है। चुनाव आते-आते हमारे यहां जाति, धर्म-संप्रदाय सारे विकास के मुद्दों पर हावी हो जाता है। जनता की मूल समस्या, दुख-तकलीफ, गरीबी, बेरोजगारी, बेहाली सारी बातें हाशिये पर चली जाती है। यही वजह है कि उत्तरप्रदेश को उत्तमप्रदेश बनाने की बात करने वाली भाजपा उत्तरप्रदेश में गुजरात के साथ-साथ काशी मॉडल की भी बात कर रही है। लोकसभा चुनाव 2014 में केन्द्र की सत्ता पर भाजपा के काबिज होने में गुजरात मॉडल का बड़ा योगदान माना जाता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहते देशभर में लोकप्रिय हुए गुजरात मॉडल को कुछ लोगों ने गुजरात में हिन्दुत्व की प्रयोगशाला भी करार दिया था। इसी गुजरात मॉडल के सहारे भाजपा पांच राज्यों में अपनी चुनावी वैतरणी पार करना चाहती है। इसी कड़ी में सबसे पहले प्रत्याशियों की चयन प्रक्रिया में आमूलचूल बदलाव शमिल है। इसके पीछे एक मकसद तो एंटी-इनकम्बेंसी फैक्टर को मात देना है तो दूसरा पार्टी के भीतर नए चेहरों के जरिए नई पीढ़ी को भी उभारना है। भाजपा ने यूपी में सत्ता की वापसी के लिए अब काशी मॉडल तैयार किया है। चलो काशी का उद्घोष करने वाली भाजपा अब दिव्य काशी-भव्य काशी की छटा देश-दुनिया को दिखाने की तैयारी में है। काशी के कायाकल्प की नींव 2014 में तब रखी गई।

जब नरेंद्र मोदी ने इसे अपनी कर्मस्थली बनाकर ऐलान किया कि मुझे मां गंगा ने बुलाया है। काशी में यूं तो सड़क, बिजली, पानी जैसी आधारभूत सुविधाओं के विकास के अलावा भी बहुत काम हुए। मगर मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट काशी विश्वनाथ कॉरीडोर का भव्यता के साथ गंगा में मोदीजी की डुबकी लगाते हुए हजारों वीडियो टीवी चैनलों की खबरों के बीच लोकार्पण हो चुका है।

हाल के दिनों में एक बदलाव देखने को ये मिला है कि अब देश में गुजरात मॉडल की बात बहुत कम होने लगी है। पिछले तीन साल से उसकी जगह पर विकास के छत्तीसगढ़ मॉडल की चर्चा जरूर जोर पकड़ रही है। छत्तीसगढ़ राज्य की मांग भारत के नक्शे में सिर्फ एक अलग राज्य के रूप में एक भौगोलिक क्षेत्र की मांग नहीं थी, बल्कि इसके पीछे सदियों की पीड़ा थी। ये छत्तीसगढिय़ा सपनों और आकांक्षाओं को पूरा करने की मांग थी। आम छत्तीसगढिय़ा की तासीर और उनकी अपेक्षाएं बिलकुल अलग हैं। बरसों की उपेक्षा और तिरस्कार, पिछड़ेपन का दंश के बावजूद अपनी अस्मिता और स्वाभिमान को बचाकर चलना यहां की खासियत है। छत्तीसगढ़ में न केवल सांस्कृतिक उत्थान के लिए छत्तीसगढ़ी त्यौहारों को महत्व दिया गया बल्कि छत्तीसगढ़ के किसानों, मजदूरों सहित सभी वर्गों के हितों को और अधिक मजबूत करने के लिए न्याय सुनिश्चित करने वाली योजनाओं की श्रृंखला शुरू की गई। छत्तीसगढ़ मॉडल में आवश्यक अधोसंरचना विकास के साथ-साथ लोगों के सामाजिक-आर्थिक विकास पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। विकास का संतुलित स्परूप ही इस मॉडल की विशेषता है। विकास के इस नये मॉडल में योजनाओं के जरिए प्रत्येक नागरिक तक सभी तरह के न्याय की पहुंच सुनिश्चित की गई है। छत्तीसगढ़ी मॉडल विकास के छत्तीसगढ़ी मॉडल में सबके लिए न्याय की अवधारणा है। यहां सिर्फ किसानों, मजदूरों, श्रमिकों के लिए ही न्याय नहीं है, न्याय की बयार, वनवासियों और मध्यम वर्ग और उद्यमियों तक भी पहुंच रही है। किसानों को उनकी उपज का वाजिब मूल्य दिलाने के लिए राजीव गांधी किसान न्याय योजना की शुरुआत हुई। गोधन न्याय योजना के माध्यम से किसानों के साथ-साथ पशुपालकों, भूमिहीनों, महिलाओं, बेरोजगारों तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित की गई। सुराजी गांव योजना के अंतर्गत नरवा-गरवा-घुरवा-बाड़ी कार्यक्रम संचालित करते हुए ग्रामीण अर्थव्यव्सथा को मजबूती दी गई और आय के अवसरों से वंचित प्रत्येक ग्रामीण के लिए नये अवसरों का सृजन किया गया। राजीव गांधी भूमिहीन ग्रामीण कृषि मजदूर न्याय योजना के माध्यम से भूमिहीन कृषि मजदूरों के लिए आय सुनिश्चित की गई। मध्यम वर्ग को न्याय देने के लिए छोटे भूखंडों के क्रय-विक्रय के साथ ही भूमि के क्रय-विक्रय की गाइड लाइन दरों में 30 प्रतिशत की कमी के साथ ही रियल इस्टेट सेक्टर को नया बूम देने के लिए 75 लाख तक के मकानों की खरीदी पर पंजीयन राशि में छूट दी गई। शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न सेवाओं की प्रक्रियाओं का लगातार सरलीकरण किया गया है। स्वास्थ्य सुविधाओं को दुर्गम क्षेत्रों के गांवों और शहरी स्लम बस्तियों में लोगों की चौखट तक पहुंचाया गया है। महिलाओं और बच्चों में कुपोषण दूर करने के लिए मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान का संचालन पूरे राज्य में किया जा रहा है। वनवासियों को न्याय देने की पहल के तहत वनोपजों की संग्रहण मजदूरी तथा समर्थन मूल्य में वृद्धि की गई। समर्थन मूल्य पर खरीदे जा रहे लघु वनोपजों की संख्या 07 से बढ़ाकर 52 कर दी गई है।

डेनेक्स कपड़ा फैक्ट्री से लेकर वनोपज संग्रह में महिला स्व-सहायता की भूमिका, देवगुड़ी के विकास से लेकर स्थानीय उपजों के वैल्यू एडिशन तक बहुत से काम किए गए हैं। अब गौठानों में गोबर से बिजली, प्राकृतिक रंग और प्राकृतिक गुलाल बनाने का काम भी शुरु किया जा चुका है। भारत गांवों में बसता है। अगर आप को राज्य की या देश की तरक्की करनी है तो गांव का विकास करना जरूरी है। सिर्फ शहरों को फोकस कर आप देश का भला नहीं कर सकते, इस बात को समझते हुए भूपेश बघेल की सरकार ग्रामीण इलाकों में तरक्की की योजना बनाई है।

प्रसंगवश-जावेद अख्तर का एक गीत है
एक हमारी और एक उनकी मुल्क में हैं आवाजें दो अब तुम पर है कौन सी तुम आवाज सुनो तुम क्या मानो
हम कहते हैं जात धर्म से इन्सा की पहचान गलत वो कहते हंै सारे इंसा एक है यह ऐलान गलत
हम कहते हंै नफरत काजो हुक्म दे वो फरमान गलत वो कहते हंै ये मानो तो सारा हिन्दुस्तान गलत
हम कहते हैं भूल के नफरत, प्यार की कोई बात करो वो कहते हंै खून खराबा होता है तो होने दो
एक हमारी और एक उनकी मुल्क में हैं आवाजें दो अब तुम पर है कौन सी तुम आवाज सुनो तुम क्या मानो
हम कहते हैं इंसानों में इंसानों से प्यार रहे वो कहते हैं हाथों में त्रिशूल रहे तलवार रहे
हम कहते हैं बेघर बेदर लोगों को आबाद करो वो कहते हैं भूले बिसरे मंदिर मस्जिद याद करो
एक हमारी और एक उनकी मुल्क में हैं आवाजें दो अब तुम पर है कौन सी तुम आवाज सुनो तुम क्या मानो