breaking news New

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से- जादू है नशा है, मदहोशियां...

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से- जादू है नशा है, मदहोशियां...

-सुभाष मिश्र
देश का युवा इधर के सालों में बहुत से कारणों से नशे की गिरफ्त में आ रहा है। पढ़ा -लिखा पैसे वाला तबका जहां महंगा और सूखा नशा कर रहा है वहीं गरीब वर्ग के युवक गांजा, भांग, सिरप और सस्ती नशीली गोली से अपने नशे की लत को पूरा कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ में ओडिशा से बड़े पैमाने पर गांजा आकर अन्य राज्यों को जा रहा है और यहां भी उसकी खपत हो रही है। अभी हाल ही में महासमुंद में दो करोड़ 60 लाख की 13 क्विंटल और 270 ग्राम ब्राउन शुगर पकड़ी गई। बार्डर पर 17 लाख 60 हजार का 88 किलो गांजा जो नदी के रास्ते लाया जा रहा था, पकड़ाया। नशे के कारण पिछले 9 महीनों में 117 लोगों की जानें गई और 22 लोगों की हत्या तथा 39 लोगों ने खुदकुशी की। अधिकांश मरने वाले मानसिक रोग का शिकार हो गए थे। नशे के कारण 46 व्यक्ति सड़क हादसे के शिकार हुए। गांजा व अन्य तरह की नशीली सामग्री पकड़े जाने की घटना छत्तीसगढ़ में आम है किन्तु इसका इतना हो-हल्ला नहीं होता जितना किसी सेलीब्रिटी के बेटे-बेटी, फिल्म, टीवी से जुड़े लोगों के पकड़े जाने पर। अभी हाल ही में छत्तीसगढ़ के जशपुर में नशे में धुत्त दो युवकों ने नवरात्रि विसर्जन की भीड़ पर गाड़ी चढ़ा दी। एक आदमी की मौके पर मृत्यु हो गई वहीं 20 लोग घायल हुए। एक्सीडेंट करने वाली गाड़ी में भी बड़ी मात्रा में गांजा भरा हुआ था यह गाड़ी मध्यप्रदेश के सिंगरौली की थी जो ओडिशा से गांजा ला रही थी।

छत्तीसगढ़-मध्यप्रदेश-ओडिशा, झारखंड, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश इन राज्यों में अभी शराबबंदी नहीं है। बावजूद इसके इन राज्यों में बड़े पैमाने पर सूखा व सस्ता नशा चलन में है। ओडिशा जो कि गांजे का बड़ा उत्पादक है। वहां से गांजा और मध्यप्रदेश के मंदसौर से अफीम व उसके गोले की तस्करी इन राज्यों में होती है। गरीब तबके के लोगों में बढ़ती प्रवृत्ति के कारण इन दिनों बहुत से लोग बोनफिक्स, बोमाफ्रिक्स, आयोडेक्स, अमृतांजन जैसे जेल को नशे के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। कुछ बच्चे इन दवाओं को ब्रेड के साथ खाने में भी उपयोग में ला रहे हैं। इसकी एक बड़ी वजह शराब की कीमतों का ज्यादा होना इस तरह की दवाओं का सस्ते में उपलब्ध होना है। इस तरह की दवाएं मेडिकल स्टोर में डाक्टर की पर्ची के बगैर बड़ी आसानी से मिल जाती है। पिछले दिनों रायपुर कोतवाली इलाके में कार में घूम-घूमकर प्रतिबंधित मशीली दवा बेचने का खुलासा हुआ है। कार से प्रतिबंधित सिरप व टेबलेट। नाइट्रोसन-10 का 43 पत्ता, स्पास्मो टोक्सवम प्लस कैप्सूल 27 पत्ता और रेकफ सिरप 3 सीसी बरामद किया गया है। बिलासपुर के सिरगिट्टी के कोरमी गांव में सिरप पीने से अब तक 9 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं कई लोगों को भर्ती कराया गया है।

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, गोल्डन ट्राएंगल में दवा उत्पादन में उछाल आया है। कई ड्रग सिंडिकेट लैब-निर्मित क्रिस्टल मेथ और अन्य सिंथेटिक हाई पर स्विच कर चुके हैं।

मुंबई को भारत में कोकीन के सबसे अधिक उपभोक्ता के रूप में अधिसूचित किया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, श्रीलंका में पिछले दो वर्षों में 2,499 किलोग्राम कोकीन जब्त की गई, पोर्ट एलिजाबेथ और पानाना का गंतव्य भारत था।

एनसीबी के अधिकारियों ने एचटी को बताया कि बैकट्रैक ड्रग जांच ने अब पुष्टि की है कि भारत, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में लिंक के साथ एक सिंडिकेट के माध्यम से दिसंबर 2018 में 300 किलोग्राम से कम कोकीन (अंतरराष्ट्रीय बाजार में 1,500 करोड़ रुपये की कीमत) मुंबई में नहीं उतरी।

25 मार्च की जब्ती में, तटरक्षक बल और एनसीबी को 3,000 करोड़ रुपये की हेरोइन एके -47 राइफल और 9 मिमी गोला बारूद के 1,000 राउंड के साथ नाव में रखी गई थी। एनसीबी ने कहा, जहाज में रहने वालों के पास से कई आपत्तिजनक दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। छह श्रीलंकाई नागरिकों को गिरफ्तार किया गया।
नशे का कारोबार विश्वव्यापी है। बहुत से देश की इकानामी नशे के कारोबार पर टिकी है यही वजह है कि वहां की सरकार द्वारा इस कारोबार को अप्रत्यक्ष रुप से संरक्षण  दिया जाता है। जिस्म फिल्म का एक गाना जिसे श्रेया घोषाल ने गाया है, जादू है नशा है, मदहोशियां तुझको भुलाके अब जाऊं कहां।

दरअसल नशे के मामले में हमारे युवाओं की हालत कुछ इसी तरह की है। गांव-गांव गुटका, तम्बाखू, शराब, गांजा, भांग, सिरप का चलन आम हो गया है। जिस तरह पंजाब बुरी तरह से नशे की गिरफ्त में आकर उड़ रहा था उसी तरह अब धीरे-धीरे बाकी राज्यों में भी नशे का कारोबार फल-फूल रहा है। इस कारोबार की जानकारी पुलिस, प्रशासन और समाज के सभी जागरूक लोगों को है किन्तु उनकी चुप्पी या असहायता चौंकाती है।