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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - किसान आंदोलन में हिंसा के लिए जिम्मेदार कौन ?

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से -  किसान आंदोलन में हिंसा के लिए जिम्मेदार कौन ?

-सुभाष मिश्र

देश में पिछले दस माह से अधिक से चल रहे शांतिपूर्ण किसान आंदोलन में जब-जब हिंसा की वारदातें हुई है तब-तब सत्ता पक्ष या शरारती तत्वों का हाथ सामने आया है। उत्तरप्रदेश लखीमपुर खीरी की ताजा घटना जिसमें 8 लोगों की हत्या हुई और बहुत से लोग घायल हुए हैं उसमें भी केंद्रीय गृह राज्यमंत्री के बेटे की संलिप्तता सामने आई है। किसान आंदोलन को भटकाने में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा और हरियाणा के मुख्यमंत्री खट्टर जैसे के बयान की आग में घी डालने का काम करते हैं। सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बैंच शांतिपूर्वक आंदोलन करने वाले किसानों को सड़कों से ना हटाया जाये कहती है। वहीं दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट पूछती है कि जब हमने तीनों कृषि कानूनों पर रोक लगा दी है तो फिर रोक के बाद किसानों का आंदोलन क्यों? लखीमपुर खीरी में किसानों के विरुद्ध हुई हिंसा के खिलाफ देश की सभी राजनीतिक पार्टियों, किसान संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। पीडि़त परिवारों से मिलने जा रही कांग्रेस की नेत्री प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव, बसपा के सतीश मिश्रा, संजय सिंह सहित बहुत सारे नेताओं को गिरफ्तार किया गया। दिल्ली, बैंगलोर सहित देश के बहुत से शहरों में किसानों के विरुद्ध हुई हिंसा के विरोध में आंदोलन होते रहे हैं। कृषि कानूनों के विरूद्घ शुरू हुआ आंदोलन अब विस्तारित हो चुका है।

लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा के बाद उत्तरप्रदेश सरकार ने मारे गये किसानों के परिवारों को 45-45 लाख रुपये का मुआवजा, सरकारी नौकरी, घायलों को दस-दस लाख रुपये तथा घटना की न्यायिक जांच तथा घटना के लिए दोषी केंद्रीय गृह राज्यमंत्री के बेटे के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई है। किसान नेता राकेश टिकैत ने केंद्रीय गृहमंत्री और उसके बेटे पर दस दिनों के भीतर कार्यवाही करने कहा है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने भी जब उत्तरप्रदेश के लखीमपुर खीरी जाने की कोशिश की तो उन्हें वहां जाने का अवसर नहीं मिला।

केंद्रीय सरकार के दृढ़ धर्मितापूर्ण रवैये के चलते किसान आंदोलन ठंडा होने के बजाय लगातार विस्तारित होता जा रहा है। दिल्ली के लाल किले की घटना के बाद लखीमपुर खीरी की घटना ने बता दिया कि सरकार किसान आंदोलन से ठीक ढंग से निपट नहीं पा रही है।

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा के गांव में वार्षिक कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन था। इस कार्यक्रम में शामिल होने आए डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का विरोध करने पहुंचे किसानों का आरोप है कि इस दौरान कथित तौर पर अजय मिश्रा के समर्थकों की गाड़ी से किसानों की टक्कर हो गई। इस घटना में छह किसानों की मौत हो गई। घटना के बाद अजय मिश्र के बेटे अभय मिश्र उर्फ मोनू पर किसानों को गाड़ी से कुचलने की कोशिश करने के आरोप हैं। गृह राज्यमंत्री अजय कुमार मिश्रा ने कहा है कि लखीमपुर खीरी में घटनास्थल के पास मेरा बेटा मौजूद नहीं था। इस हिंसा में कुल आठ लोगों की मौत हो चुकी है। जिनमें चार किसान और चार अन्य लोग हं। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा सोमवार को उत्तर प्रदेश के सीतापुर में हिरासत में लेने के बाद भूख हड़ताल पर बैठी।

लखीमपुर खीरी की घटना को लेकर छत्तीसगढ़ में भी सियासत शुरू हो गई। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने सीएम से पूछा- सिलगेर में कई आदिवासी मारे गए, राहुल, प्रियंका और भूपेश बघेल में से कौन गया मिलने? उत्तर प्रदेश के लखीमपुर में हुई घटना बेहद दु:खद है, लेकिन लाशों पर राजनीति करना क्या सही है? बस्तर के सिलगेर में पुलिस की गोली से कई आदिवासी किसान मारे गए। पांच महीने से वो आंदोलन कर रहे हैं लेकिन राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और भूपेश बघेल में से कौन गया उनसे मिलने। यह दोहरा रवैया क्यों? इसके जवाब में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रायपुर हवाई अड्डे पर कहा, सिलगेर में भाजपा को जाने से हमने नहीं रोका। वो खुद ही नहीं गए। क्यो नहीं गए रमन सिंह ? वो तो आधे रास्ते से लौटकर वापस आ गए। हमने सिलगेर जाने से किसी को नहीं रोका तो ये लखीमपुर जाने से क्यो रोक रहे हैं। हम क्यों पीडि़त परिवार से नहीं मिल सकते।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर खट्टर के रविवार को सामने आए बयान का हवाला देते हुए कहा भाजपा के चेहरे से नकाब उतर गया है। उनका असली चेहरा यह है कि लाठियां भांजों, गोलियां दागो, गाडिय़ों से रौंद दो, आग लगा दो, खत्म कर दो। सही मायने में भाजपा का चरित्र देश के सामने अब आया है। उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरुआत में राज्य के चुनावों से पहले विवादास्पद नए कृषि कानूनों को लेकर 10 महीने से चल रहे किसान आंदोलन में नाटकीय रूप से तेजी आई है। केंद्रीय मंत्री और उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य के दौरे को रोकने के लिए एकत्रित हुए किसानों ने कहा कि लखीमपुर खीरी जिले में उनकी कार द्वारा प्रदर्शनकारियों को कुचलने के बाद हिंसा शुरू हुई। किसान संघ के नेता डॉ दर्शन पाल ने कहा कि किसानों ने मंत्रियों के आगमन को रोकने के लिए हेलीपैड का घेराव करने की योजना बनाई थी। एक बार यह समाप्त हो गया और अधिकांश लोग वापस जा रहे थे, तभी तीन कारें आईं...और किसानों को कुचल दिया। एक किसान की मौके पर ही मौत हो गई और दूसरे की अस्पताल में। उन्होंने कहा कि मंत्री का बेटा कार में था।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा है की हम कारणों की विस्तार से जांच करेंगे और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हम सभी से शांति बनाए रखने की अपील करते हैं। लखीमपुर खीरी में भारी पुलिस बल है और इलाके में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं। सरकार को चाहिए की वह अविलंब हिंसक और उग्र होते किसान आंदोलन की ईमानदारी से पड़ताल कर किसान विरोधी कानूनों को वापस लेकर नये सिरे से विचार करे। जिद किसी की भी हो राष्ट्र हित में कतई ठीक नहीं है।