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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - अफवाहों के बाजार में कका अभी जिन्दा है

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - अफवाहों के बाजार में कका अभी जिन्दा है

-सुभाष मिश्र

इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया पर इस समय बहुत सारे सुपारी किलर सक्रिय हैं, जो सुबह से ही किसी की चरित्र हत्या करने या उसके होने या नहीं होने का ऐलान करते है। ये सोशलाइट सुपारी किलर अपने-अपने मोबाइल वाट्सऐप में बैठकर किसी ज्योतिष, भविष्य वक्ता की तरह कल, आज और कल के बारे में ऐसी बातें बताते हैं, मानो ये हर युग में उपस्थित रहे हैं। ये हमारे न्यायालयों में अक्सर उपस्थित रहने वाले उस चश्मदीद गवाह की तरह हैं जो कभी भी उपस्थित  हो जाते है और हमारे न्यायालय भी इनहें चश्मदीद गवाह मान लेता हैं। इन लोगों को पहले से यह इल्म होता हैं, की फलॉं जगह यह वारदात होने वाली है और न्यायालयों की ही तरह बहुत बड़ा जनसमुदाय, भक्तगण इनकी झूठी बातों को सच मानकर इनकी रची थौयरी को अलग-अलग समूहों में फॉरवर्ड करके इसे फैलाते हैंऔर देखते ही देखते भेड़चाल की तरह पूरे देश में एक सा स्वर गूंजने लगता हैं। माँ भारती के बहुत से सच्चे सपूत बिना हाथ-मुँह-धोये, ब्रश कियें अल सुबह से ही राष्ट्र सेवा में लगकर एक अलग तरह की अलख जगाने में लग जातें हैं। हिटलर के प्रोपेगेंडा मंत्री पॉल जोसेफ गोएबल्स की तरह एक झूठ को बार-बार बोलने सें लोग को उनकी बातें सच लगने लगती हैं।

छत्तीसगढ़ में इस समय ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री की चर्चा जोरों पर हैं। कुछ सुपारी किलर न्यूज चैनल, सोशल मीडिया और बहुत सारे वाट्सऐप गु्रप के जरिये से हर तीसरे दिन मुख्यमंत्री बदलने की कवायद सुर्खियों, चौराहों और चर्चाओं में रहती हैं। एक फिल्मी गाना है- जरा सी आहट होती हैं और दिल सोचता हैं कहीं ये वो तो नहीं, इस गाने की तर्ज जब-जब बाबा और कका दिल्ली जाते हैं, तो सुपारी किलर सक्रिय हो जाते हैं। लगता है भूपेश सरकार गई, बाबा सरकार आई।
सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई ने लिखा था की देश में तीन तरह के जन होते हैं सज्जन, दुर्जन और कांग्रेस जन। गाँधी की विरासत से अपने को जोडऩे वाले ये कांग्रेस जन गाँधी जी के सरे आम अपमान, कांग्रेस की गौरवशाली परंपरा की गोड़से के वंशजो द्वारा लगातार हत्या पर चुप रहते हैं। इन्हें गांधी जी कमिशन , ठेकेदारी, चंदे से मिले नोटो में ही नजर आते हैं।

नेहरू-गाँधी परिवार के नए सिपाहसालार अपनी सुविधा से ही सक्रिय-निष्क्रिय होते हैं। विरासत में मिली पार्टी को नरेंद्र मोदी जैसे तेज तर्रार नेता और राष्ट्रीय स्वयं  सेवक के मार्गदर्शन से संचालित भाजपा और उस जैसी सोच वाली पार्टियों से कैसे निपटना हैं, उन्हें नहीं मालूम। वे अपने हाथों का निवाला खुद बनाकर दूसरों के मुंह में देने के लिए आमदा हैं। मध्यप्रदेश में इस तरह की गलती करके इसे अब पंजाब छत्तीसगढ़, राजस्थान में दोहराना चाहते हैं। जहाँ तक छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के रहने या बदले जाने की बात है उसे या तो कांग्रेस आलाकमान जो अंतरिम अध्यक्ष के साथ-साथ अभी-अभी पूर्वकालिक भी हो गई हैं श्रीमती सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी तथा भूपेश बघेल और टी.एस. सिंहदेव जानतें होंगे। दोनों के बीच क्या वादा हुआ, उसे कैसे पूरा किया जायेगा। ये बाकी लोगों को क्या मालूम। सबके अपने-अपने अनुमान हैं, कवायद हैं। परन्तु टीवी चैनल, सोशल मीडिया और कुछ लोगों की बातें सुनकर लगता है कि इन्हीं से पूछकर सब तय होता है।

वैसे आजकल मोहब्बत और राजनीति में कोई वादा काम नहीं करता। जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा जैसे गाने अब बेमानी हैं। बहुत सारी गठबंधन की सरकारों ने जिसमें भूपेश बघेल को हटाने में सर्वाधिक रूचि लेने वाली भाजपा ही क्यों न हो कभी भी अपने वादों को पूरा नहीं किया। राजनीतिक फैसले समय की नजाकत और जमीनी हकीकत को देखकर लिए जाते हैं। छत्तीसगढ़ के मामले में सारा रायता कांग्रेस आलाकमान का ही फैलाया हुआ हैं। महाभारत के युद्ध में जिस तरह शिखंडी की आड़ लेकर भीष्म पितामह को शव शैय्या पर लेटने मजबूर किया गया था, उसी तरह विधान सभा चुनाव में प्रचंड बहुमत से विजयी कांग्रेस को तरह-तरह के बाबाओं, ओझा, गुनिया, बैगाओं की आड़ लेकर शव शैय्या पर लिटाने की तैयारी है। भीष्म पितामह की तरह बहुत से कांग्रेस जन ढाई वर्ष का दक्षिणायन समाप्त होने की प्रतीक्षा कर रहे है।

कांग्रेस ने 2018 छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों में 90 विधानसभा सीटों में से 68 सीटों पर जीत हासिल की थी। चूंकि चुनाव में मुख्यमंत्री के रूप में किसी को प्रोजेक्ट नहीं किया गया था, सो आलाकमान ने चार नेताओं भूपेश बघेल, टी.एस. सिंहदेव, चरणदास महंत और ताम्रध्वज साहू शमिल थे, को दिल्ली बुलाया। कथित तौर पर इस बैठक में राहुल गांधी ने 2.5-2.5 फॉर्मूला प्रस्तावित किया, जिसका मतलब था कि बघेल और देव ढाई-ढाई साल तक शीर्ष पद पर बने रहेंगे।
भूपेश बघेल और टी.एस. सिंहदेव के बीच ढाई-ढाई साल सीएम पद के फार्मूले पर सहमति बनी थी। हालांकि टीएस सिंहदेव, भूपेश बघेल और प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया भी ऐसे किसी फार्मूले से इंकार करते रहे हैं। कभी शोले फिल्म की जय और वीरू की जोड़ी की तरह भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव की जोड़ी हुआ करती थी। किंतु अब सत्ता संघर्ष के चलते यह जोड़ी कका और बाबा में तब्दील हो गई हैं। कांग्रेस रुपी परिवार में सत्ता के बंटवारे को लेकर दोनों खेमे विपक्ष से ज्यादा एक दूसरे के प्रिय कलाकारों पर नजर रखे हुए हैं। सत्ता संघर्ष के इस खेल में भूपेश के दिल्ली में पचास से अधिक विधायकों के जमावड़े के बाद रायपुर लौटने पर भब्य स्वागत हुआ, इस दौरान मीडिया के सवालों के जवाब भूपेश बघेल ने इतना कहा कि मैंने सीएम के तौर पर राहुलजी को छत्तीसगढ़ आमंत्रित किया है। राज्य में नेतृत्व परिवर्तन के सवालों को टालते हुए उन्होंने यह भी कहा कि इसका जवाब प्रदेश कांग्रेस प्रभारी पीएल पुनिया पहले ही दे चुके हैं। फिलहाल वे जंग जीत गये हैं। ऐसा लगा किन्तु थोड़े दिन नहीं बीते कि फिर से सत्ता बदले जाने का राग मीडिया के जरिए अलापा जाने लगा।

बहुत से अवसर पर भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव ने मीडिया के सामने ढाई-ढाई साल के फॉमूलें से इंकार किया। टीएस सिंहदेव ने पत्रकारों से कहा कि अब 2.5 साल के फॉर्मूले पर अब चर्चा नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि भूपेश बघेल सरकार पहले ही 2.5 साल का कार्यकाल पूरा कर चुकी है। यह सवाल अब प्रासंगिक नहीं है क्योंकि बघेल सरकार पहले ही उक्त कार्यकाल पूरा कर चुकी है। इसके बाद सिंहदेव ने कहा कि हमारी हाईकमान के साथ पूरी बात हो गई है। अंतिम निर्णय उनके पास सुरक्षित है। कुछ अड़चनें भी रहती हैं। निर्णय में कुछ समय भी लग सकता है। समय-समय पर उनके ये बयान और दिल्ली दौरे ने लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनाने में सफल रही।

भूपेश बघेल के नेतृत्व में आस्था जताने दिल्ली पहुंचे बघेल सरकार में मंत्री अमरजीत भगत का कहना था जब कोई टीम अच्छा प्रदर्शन नहीं करती है तो उसके कप्तान को बदलने की मांग उठती है, लेकिन छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल की टीम अच्छा काम कर रही है। अभी हाल ही में जारी की गई आईएएनएस-सी वोटर गवर्नेंस इंडेक्स के अनुसार छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल देश में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले मुख्यमंत्री हैं। बघेल को सभी मुख्यमंत्रियों के बीच सर्वोच्च लोकप्रियता रेटिंग प्राप्त हुई है। रिपोर्ट में बताया गया है की बघेल ने छत्तीसगढ़ में कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू की हैं, जिनमें निजी स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करना शामिल है, जिन्होंने कोविड-19 के लिए माता-पिता / अभिभावकों को खो दिया है। महतारी दुलार योजना के तहत ऐसे बच्चों की पढ़ाई का खर्च छत्तीसगढ़ सरकार वहन कर रही है। नीति आयोग की एसडीजी इंडिया इंडेक्स रिपोर्ट 2020-21 के अनुसार,  सतत् विकास लक्ष्यों के लैंगिक समानता पैरामीटर पर छत्तीसगढ़ भारत में शीर्ष प्रदर्शन करने वाला राज्य है। नीति आयोग 115 संकेतकों पर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की प्रगति को ट्रैक करता है। पिछले साल, छत्तीसगढ़ ने लैंगिक समानता पैरामीटर पर 43 अंक हासिल किए और भारत में सातवें स्थान पर था। इस साल, छत्तीसगढ़ ने 61 स्कोर किया और चार्ट में शीर्ष स्थान पर रहा। सी वोटर के संस्थापक यशवंत देशमुख ने कहा, ऐसे मुख्यमंत्रियों को लोगों ने पसंद किया है जिनमें निर्णय लेने की क्षमताएं हैं और जिनके काम करने की शैली सीईओ जैसी है।

कांग्रेस नेताओं के बार-बार दिल्ली दौरे को लेकर पूर्व सीएम रमन सिंह ने कई बार तंज कसा है। वे सिंहदेव की बॉडी लैंगवेज और यहां की कांगे्रस की लड़ाई को लेकर अक्सर सरकार को आड़े हाथ लेते हैं। पंजाब के बाद अब छत्तीसगढ़ कांग्रेस में भी सियासी घमासान मचा हुआ है। वहीं कांग्रेस विधायकों के बार-बार दिल्ली दौरे पर सीएम भूपेश बघेल ने भी बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मीडिया इसके पीछे क्यों पड़ी है, विधायक आते-जाते रहते हैं, कोई राजनीतिक घटनाक्रम हुआ क्या? गए हैं आ जाएंगे। हर व्यक्ति स्वतंत्र है कोई आदमी आए जाए। जब कोई राजनीतिक घटनाक्रम हो तब जोड़ा जाना चाहिए, जब कोई घटना ही नहीं घट रही है तो उसे राजनीतिक चश्मे से क्यों देखा जा रहा है।

बहुत सारे लोगों को लगता है कोउ नृप होइ हमैं का हानी,चेरि छाडि़ अब होब की रानी। दरअसल यह मामला ऐसा नहीं है जो लोग भूपेश बघेल के जुझारू तेवर, छत्तीसगढ़ी अस्मिता और ग्रामीण, किसान हितैषी पृष्ठभूमि कार्यशैली से परिचित है, उन्हें भूपेश है तो भरोसा है। एआईसीसी के बुलाने पर जब ताम्रध्वज साहू और टीएस सिंहदेव दिल्ली जाते हैं तब या राहुल गांधी के राजनीतिक सलाहकार सचिन राव छत्तीसगढ़ पहुंचते है, तो लोगों के बीच यह मैसेज पहुंच जाता है की अब भूपेश बघेल बदले जायेंगे। ढाई-ढाई साल की इस राजनीति में अच्छी खासी छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार के कामकाज और व्यवहार में भारी तब्दीली ला दी है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के हर फैसले, काम को बहुत से लोग उनकी कथित विदाई से जोड़कर प्रचारित-प्रसारित कर रहे है और इस काम में सोशल मीडिया पर तैनात सुपारी किलर गैंग के लोग अहम भूमिका निभा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ में चल रही सियासी खिंचातान के बीच बबा और कका दोनों शायद सुदर्शन फाकिर का यह शेर याद करते होंगे-
मेरा क़ातिल ही मेरा मुंसिफ़ है
क्या मिरे हक़ में फ़ैसला देगा ।।