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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से -माया महा ठगनी हम जानी

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से  -माया महा ठगनी हम जानी

- सुभाष मिश्र 

अर्थशास्त्र का सिद्घांत है कि खराब मुद्रा, अच्छी मुद्रा को चलन से बाहर कर देती है। लेकिन अब समय के साथ मुद्रा यानी कैरेंसी बदल रही है। युवाओं में क्रिप्टो कैरेंसी का बहुत चलन है। दरअसल जब बैंकों ने ब्याज दर घटाई, जमा और निकासी पर शुल्क तक लगा दिया, शेयर मार्केट जब तेजी से गिरने लगे ऐसे समय में युवाओं को बिट क्वाईन जैसी क्रिप्टो कैरेंसी जो कम में ज्यादा मुनाफा दे रही थी, लुभाने लगी।

संत कबीर ने बहुत पहले ही कह दिया है-
माया महाठगिनी हम जानी,

दरअसल, हम जिस समय में जी रहे हैं, वहां लोगों को सब कुछ जल्दी में चाहिए। नई अर्थव्यवस्था और बाजार कम में ज्यादा या कहें एक के साथ एक फ्री की प्रवृति को बढ़ावा दे रहा है। इस समय देश के डेढ़ से दो करोड़ लोगों ने क्रिप्टो कैरेंसी पर अपना पैसा लगाया है। दुनिया में 4 सौ डिजिटल कैरेंसी चलन में है। साल्वाडोर दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जिसने क्रिप्टो कैरेंसी को मान्यता दी है। क्रिप्टो कैरेंसी आज दुनिया की 5वें नंबर की कैरेंसी बन गई है। विश्व स्तरीय इस डिजिटल करेंसी में लोगों को सुरक्षा और लाभ दिखाई देता है। यह कैरेंसी तेजी से लोकप्रिय हुई है। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती कम्प्यूटर आन एयर की है कि इस कैरेंसी के चलन को कैसे रोकें? जिस तरह सरकार ओटीटी प्लेटफार्म पर उपलब्ध किसी कटेंट को तक नहीं रोक पा रही है। तमाम कानूनी प्रावधानों के बावजूद सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर होने वाली पोस्ट पर अंकुश नहीं लगा पा रही है, उसी तरह इस विश्व की नई डिजिटल मुद्रा को कैसे रोक पाएगी, क्योंकि यह मुद्रा पूरी तरह से कम्प्यूटर, डिजिटल प्लेटफार्म के हवाले है। इस मुद्रा के चलन बढऩे से देश में हो रहे आयान-निर्यात से भी सरकार की आय प्रभावित हो रही है। लोग डिजिटल प्लेटफार्म पर टोकन लेकर इस क्रिप्टो कैरेंसी के मेंबर बन रहे हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास के अनुसार क्रिप्टो-मुद्राएं व्यापक आर्थिक और वित्तीय स्थिरता के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है।  सरकार 29 नवंबर से शुरू होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र में आधिकारिक डिजिटल मुद्रा विधेयक, 2021 का क्रिप्टोक्यूरेंसी और विनियमन पेश करने के लिए तैयार है। विधेयक का उद्देश्य आधिकारिक डिजिटल मुद्रा के निर्माण के लिए एक सुविधाजनक ढांचा बनाना है। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किया जाना है। बिल भारत में सभी निजी क्रिप्टोकरेंसी को प्रतिबंधित करने का भी प्रयास करता है, हालांकि, यह कुछ अपवादों को क्रिप्टोकरेंसी और इसके उपयोग की अंतर्निहित तकनीक को बढ़ावा देने की अनुमति देता है, यह लोकसभा पर एक अधिसूचना में कहा गया है। निजी क्रिप्टो-मुद्राओं की परिभाषा सरकार द्वारा अभी तक स्पष्ट नहीं की गई है। कुछ परिभाषाओं के अनुसार, बिटकॉइन, एथेरियम और कई अन्य क्रिप्टो टोकन सार्वजनिक ब्लॉकचेन नेटवर्क पर आधारित हैं, जिसका अर्थ है कि नेटवर्क का उपयोग करके किए गए लेन-देन का पता लगाया जा सकता है, जबकि अभी भी उपयोगकर्ताओं को गुमनामी की डिग्री प्रदान की जाती है। दूसरी ओर, निजी क्रिप्टोकरेंसी मोनेरो, डैश और अन्य को संदर्भित कर सकती है, जो हालांकि सार्वजनिक ब्लॉकचेन पर निर्मित हैं। उपयोगकर्ताओं को गोपनीयता प्रदान करने के लिए लेनदेन की जानकारी को बाधित करते हैं। बिटकॉइन गुमनामी प्रदान करता है, मोनेरो गोपनीयता प्रदान करता है और इसलिए, एक निजी टोकन है। पड़ोसी राष्ट्र चीन ने सितंबर में क्रिप्टो पर पूर्ण प्रतिबंध जारी किया।

कहा जाता है कि जिसका सिक्का चलता है, राज भी वही करता है। अभी हमारे देश में भारत सरकार की करेंसी चलन में है। बाकी देशों की भी वही कैरेंसी चलन में है। जिसे उस राष्ट्र ने मंजूरी दी है। क्रिप्टो कैरेंसी के जरिए प्रायवेट कैरेंसी को अधिक मुनाफा के लालच में जिस तरह से बढ़ावा मिल रहा था उससे हमारी सरकार घबरा गई है। सरकार अब भारत में प्रायवेट कैरेंसी पर पूरी तरह पाबंदी लगाने की सोच रही है। अगले शीतकालीन सत्र में इसे लेकर एक अध्यादेश लाये जाने की योजना है।
लोग कहते हैं कि क्रिप्टो करेंसी का ना भूत है, ना भविष्य। यह हमारी आर्थिक व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है। इस क्रिप्टो करेंसी को कौन लेकर आया है, कौन इसे संचालित कर रहा है, इसकी कोई अधिकृत जानकारी नहीं है। इसके बावजूद लोग लालच के चक्कर में ग्रसित होकर अपनी जमा पूंजी इसमें लगा रहे हैं।
दरअसल हमारे देश में बचत की एक लंबी परंपरा है। लोग बेटी-बेटे की शादी और अपने बुढ़ापे के लिए बहुत सी बचत करते हैं। बेटियों के पैदा होने के साथ ही उनके दान-दहेज के लिए तरह-तरह की बचत करते हैं। लोग मुसीबत के दिनों के लिए सोना खरीदते हैं। अभी दो दशकों से लोग जमीनों में, शेयर में ज्यादा पैसा इन्वेस्ट कर रहे थे। बैंकों, पोस्ट आफिस में की जाने वाली छोटी-छोटी बचत, फिक्स डिपाजिट पर ब्याज दर कम होने के कारण लोग अब धीरे-धीरे चिटफंड कंपनी और ऐसी संस्थाओं की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जो कम समय में ज्यादा मुनाफे की बात करते हैं। बहुत सारे बैंक भी अपने उपभोक्ताओं को उनके बचत खातों में जमा राशि, उनके ट्रांजेक्शन को देखकर उन्हें बहुत सारी दूसरी योजनाओं में इन्वेस्ट करने के लिए प्रेरित करते रहते हैं। इधर के कुछ सालों में इंटरनेट बैंकिंग में हो रहे फ्रॉड की वजह से लोगों को एक सुरक्षित मजबूत ऐेसी बैंकिंग प्रणाली चाहिए जो लोगों को ज्यादा लाभ दिला सके। ऐेसे लोग जो पूरी दुनिया में अपना कारोबार करना चाहते हैं या जिनका अपना देश के बाहर आना-जाना लगा रहता है, ऐसे लोगों को ऑनलाईन क्रिप्टो करेंसी आकर्षित करती है। चंूकि इस पर सरकारों का किसी प्रकार को कोई नियंत्रण नहीं है। इसलिए यह खतरा बना हुआ है कि आने वाले सालों में पूरी दुनिया का बड़ा वित्तीय घोटाला साबित ना हो।

बशीर भद्र साहब का एक शेर प्रसंगवश याद आता है—
नई-नई आँखें हों तो हर मंजऱ अच्छा लगता है
कुछ दिन शहर में घूमे, लेकिन अब घर अच्छा लगता है
मिलने-जुलने वालों में तो सब ही अपने जैसे हैं
जिस से अब तक मिले नहीं वो अक्सर अच्छा लगता है।।