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चुपके से सीमांकन कर हस्तांतरित की जा रही थी जमीन, ग्रामवासियों ने जमकर मचाया बवाल

चुपके से सीमांकन कर हस्तांतरित की जा रही थी जमीन,  ग्रामवासियों ने जमकर मचाया  बवाल

रामनारायण गौतम 


सक्ती।  अकलतरा विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम मुड़पार के शासकीय जमीन में एथेनाल प्लांट के सीमांकन के दौरान ग्रामवासियों ने जमकर विरोध जताया हैं। ग्रामीणों का  आरोप है कि बिना जानकारी दिये तथा ग्रामवासियों के विरोध के बावजूद शासकीय भूमि का सीमांकन कर उक्त एथेनाल एंड स्प्रिट कंपनी को चुपके से दी जा रही है सीमांकन के दौरान अच्छा खासा बवाल हुआ।

प्रक्रिया बंद करा दी गई।  ग्रामीणों का आरोप है कि उक्त कंपनी के लिए बनारी के रमेश सुल्तानिया को उद्योग विभाग ने ग्रामवासियों के जानकारी के बगैर उनके विरोध के बावजूद शासकीय भूमि का न केवल सीमांकन किया बल्कि उसे हस्तांतरित किये जाने की तैयारी की जा रही है। 

जैसे ही लोगों ने बड़ी संख्या में पहुंचे और विरोध जताने लगे। काफी गहमा-गहमी भी हुई। इसके बाद एक पंचनामा भी तैयार किया गया। जिसके अनुसार न्यायालय तहसीलदार के आदेश के परिपालन में सब लोग वहां पर उपस्थित थे। मौका जांच हेतु संयुक्त टीम गठित की गई थी। संयुक्त टीम ने चालू नक्शा से मिलान का काम शुरू किया ही था कि ग्रामवासियों ने आपत्ति जताई फिर जांच प्रक्रिया बंद की को इस बात का पता चला तो उन गई फिर पंचनामा कराया गया।

गौरतलब हैं कि  मुड़पार गांव में सरकार ने एथेनॉल फैक्ट्री लगाने का फैसला किया हैं। मगर ग्रामीण इसका विरोध 6 माह पूर्व से  विरोध शुरू हो गया था। मुड़पार के एक किसान राजेश ढोसले और ग्रामीणों का कहना है कि जिस जगह प्लांट लगेगी। उसके अगल-बगल हमारी काफी जमीनें हैं। यदि ये प्लांट लग जाएगा तो हमारी जमीनें बंजर हो जाएंगी। ग्रामीणों का कहना है कि जहां प्लांट लगना है।

वहां और उसके आस-पास हमारी अलग-अलग हिस्सों में जमीन हैं। यहीं हम खेती किसानी करते हैं। ऐसे में अगर यहां प्लांट लग गया तो यह जमीन बंजर हो जाएगी और हम कहां खेती किसानी करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि हमारे पास कहीं और भी जमीन नहीं है जिस पर हम खेती किसानी कर अपना जीवन यापन कर सकें। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि उक्त प्लांट को किसी अन्य जगह स्थापित किया जाये।