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मिस्र का पांचवां अल गूना फिल्म फेस्टिवल

मिस्र का पांचवां अल गूना फिल्म फेस्टिवल


-अल गूना ( मिस्र) से अजित राय
मिस्र की राजधानी काहिरा से 440 किलोमीटर दूर लाल सागर के किनारे बसे निजी शहर अल गूना का 5 वां फिल्म समारोह अरब सिनेमा का नया आईना है। 75 फिल्मों और दो लाख चौबीस हजार डालर के 16 पुरस्कारों के साथ यह समारोह दुनिया भर के फिल्म प्रेमियों को आकर्षित कर रहा है। इस बार करीब 12 लोगों का भारतीय प्रतिनिधिमंडल यहां आया हुआ है जिसमें न्यूयार्क इंडियन फिल्म फेस्टिवल के डायरेक्टर असीम छाबड़ा से लेकर जूरी में शामिल बालीवुड के प्रसिद्ध फिल्मकार कबीर खान शामिल हैं। एन एफ डी सी की पूर्व प्रमुख नीना लाठ गुप्ता और ओसियान की इंदु श्रीकांत भी क्रमशः स्प्रिंग बोर्ड और नेटपैक जूरी की सदस्य हैं जबकि रमण चावला मुख्य प्रोग्रामर है।


इस बार भारत की दो फिल्में यहां दिखाई जा रही है। आदित्य विक्रम दासगुप्ता की बांग्ला फिल्म ' वंस अपान ए टाइम इन कलकत्ता ' मुख्य प्रतियोगिता खंड में है। दिल्ली के प्रदूषण पर कान फिल्म समारोह के आफिशियल सेलेक्शन में दिखाई जा चुकी राहुल जैन की डाक्यूमेंट्री ' इनविजिबल डेमंस '  का यहां विशेष प्रदर्शन किया जा रहा है।  इन दोनों भारतीय फिल्मों को यहां के दर्शक बहुत पसंद कर रहे हैं।

अल गूना फिल्म फेस्टिवल के निर्देशक इंतिशाल अल तिमिमी कहते हैं कि उन्हें भारत से बेइंतहा मोहब्बत है। मिस्र और भारत के बीच करीब पांच हजार सालों से अनोखा रिश्ता रहा है। वे केरल अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह की जूरी में भी रह चुके हैं। अडूर गोपालकृष्णन, शाजी एन करूण, मणि कौल से उनकी गहरी दोस्ती रही है। उन्होंने मणि कौल की महिला मित्र के बंगले में नीदरलैंड्स में उनके साथ जो एक सप्ताह समय बिताया, उसकी यादें आज भी ताजा है। उनका मानना है कि पिछले पंद्रह सालों से हिंदी में न्यू वेव सिनेमा का जो आंदोलन चल रहा है, वह भारतीय सिनेमा को काफी हद तक बदल रहा है।


भारत से अपने रिश्ते के बारे में इंतिशाल अल तिमिमी कहते हैं कि किशोरावस्था से ही हिंदी फिल्मों की अभिनेत्रियों से उन्हें गहरा लगाव हो गया था। इसी वजह से वे भारत में पढ़ना चाहते थे। वर्षों बाद उन्हें ओशियान सिनेफैन फिल्म फेस्टिवल की ओर से दिल्ली से इंदु श्रीकांत  का फोन आया। उन्हें अपने फेस्टिवल के लिए  सीरीया की एक फिल्म चाहिए थी जिसमें वे तिमिमी की मदद चाहती थीं। उन्होंने वह फिल्म उन्हे दिलवा दी। अगले साल वे ओशियान के लिए अरब दुनिया से चुनी हुई चौदह फिल्में लेकर दिल्ली गए।  उनकी कोशिशों से पहले जो  केवल ' एशियाई फिल्मों का समारोह ' होता था उसमें अरब शब्द जोड़ा गया और तब उसे ' एशियाई और अरब सिनेमा का समारोह ' नाम दिया गया। उस साल वे अरब दुनिया से 28 फिल्में और 70 फिल्मकारों के भारी भरकम प्रतिनिधि मंडल के साथ दिल्ली पहुंचे। तब तक ओशियान ने उन्हें अपना सलाहकार बना लिया था।

पांचवे अल गूना फिल्म फेस्टिवल में दिखाई जा रही अधिकतर फिल्मों में शरणार्थी समस्या, आतंकवाद और मनुष्यता पर युद्ध के ख़तरों को दर्शाया गया है। सिने गूना प्लेटफार्म खंड में अरब के युवा फिल्मकारों की मदद के लिए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रोत्साहन योजनाएं शुरू की गई है जिनमें करीब तीन लाख डालर के  नकद पुरस्कार भी है
      ‌राहुल जैन की फिल्म ' इनविजिबल डेमंस ' में दिल्ली और देश में जानलेवा प्रदूषण की समस्या की तह में जाने की कोशिश की गई है। ऐसी भयानक दिल्ली पहली बार सिनेमा में दिखाई गई है। एक ओर भारत को तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्था वाला देश कहा जाता है तो दूसरी ओर राजधानी दिल्ली के चारों ओर कचरा कबाड़ गंदगी और बीमारियों का नरक फैलता जा रहा है। दिल्ली में प्रदूषण के कारण अस्सी प्रतिशत लोगों के फेफड़े हमेशा के लिए खराब हो जा रहे हैं। यमुना नदी गंदे काले नाले में तब्दील हो गई है। एक ओर थोड़ी सी बारिश से हर जगह पानी भर जाता है तो दूसरी ओर पीने के पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। प्लास्टिक का कचरा खाकर मरती गाएं हैं तो कूड़े के ढेर पर बच्चे भटक रहे हैं।

आदित्य विक्रम सेनगुप्ता की फिल्म ' वंस अपान ए टाइम इन कलकत्ता ' में एक साथ कई कहानियां हैं जिनमें हर कोई जिंदगी की जंग लड़ रहा है। पति से असंतुष्ट और अलग रह रही अधेड़ अभिनेत्री, चिट फंड कंपनी का एजेंट और उसका मालिक, उजाड़ थियेटर में मृत्यु का इंतजार करता पूर्व अभिनेता, भ्रष्ट व्यवस्था से लड़ता एक इंजीनियर और अंत में सारी लड़ाईयां हारते लोग। फिल्म एक कालखंड की त्रासदी को पूरी कलात्मकता से पेश करती है।  पांचवें अल गूना फिल्म फेस्टिवल में दुनिया भर से चुनी हुई 16 फीचर फिल्में मुख्य प्रतियोगिता खंड में है, 23 शार्ट फिल्में, 10 डाक्यूमेंट्री , 20 फिल्में आऊट आफ कंपीटिशन है और विश्व के महान फिल्मकार क्रिस्तोफ किस्लाव्स्की ( पोलैंड) की  6 रिस्टोर फिल्मों का विशेष प्रदर्शन किया जा रहा है। इस समय गुणवत्ता के लिहाज से अल गूना फिल्म फेस्टिवल अरब दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समारोह बन चुका है।