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नैनीताल झील के अस्तित्व को खतरा उत्पन्न, हाईकोर्ट ने सरकार से किये सवाल

नैनीताल झील के अस्तित्व को खतरा उत्पन्न, हाईकोर्ट ने सरकार से किये सवाल

नैनीताल।  सरोवरनगरी नैनीताल के अस्तित्व से जुड़े बलियानाले के मामले को उत्तराखंड उच्च न्यायालय की ओर से बुधवार को बेहद गंभीरता से लिया गया और सरकार से पूछा गया कि तीन साल में सरकार की ओर से क्या कदम उठाये गये हैं?

मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति एनएस धनिक की युगलपीठ में इस प्रकरण की सुनवाई हुई। आपदा प्रबंधन सचिव एसए मुरूगेशन आज वर्चुअली अदालत में पेश हुए। अदालत ने पूछा कि उच्च न्यायालय की ओर से गठित उच्चस्तरीय कमेटी की ओर से 2018 में बलियानाले को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की गयी थी। जिसमें अल्पकालिक और दीर्घकालिक कदम उपाय सुझाये गये थे।

अदालत ने उनसे पूछा कि अभी तक सरकार कछुआ चाल से क्यों चल रही है। श्री मुरूगेशन ने अदालत को बताया कि प्रदेश सरकार बलियानाले में हो रहे भूस्खलन को लेकर गंभीर है और पुणे की एक निजी कंपनी को काम का जिम्मा सौंपा गया है।

उन्होंने बताया कि मुख्य सचिव एवं आपदा प्रबंधन सचिव की अगुवाई में इसी साल दो उच्चस्तरीय बैठकें हो चुकी हैं। सरकार की ओर से बलियानाले के काम के लिये अलग से 20 करोड़ रूपये का बजट का प्रावधान किया गया है। कोरोना महामारी के चलते कार्य बाधित हुआ है। जापान की जीका कंपनी के बाद पुणे की एक निजी कंपनी को बलियानाले की जिम्मेदारी सौंपी गयी है।

उन्होंने यह भी बताया कि बलियानाले में भूस्खलन को रोकने को लेकर कुछ अल्पकालिक कदम उठाये गये हैं। भूस्खलन के चलते 85 परिवारों को यहां से हटाया गया है। कुछ परिवारों को विस्थापित कर दिया गया है। श्री मुरूगेशन की ओर से यह भी कहा गया कि पिछले महीने अक्टूबर में आयी आपदा के चलते बलियानाले में हुए भूस्खलन से उनके उपकरणों एवं पूर्व चेतावनी सिस्टम को नुकसान पहुंचा है और एक महीने के अंदर इन्हें पुर्नस्थापित कर दिया जायेगा।

याचिकाकर्ता अधिवक्ता सैयद नदीम खुर्शीद की ओर से हालांकि इस पर आपत्ति दर्ज की गयी और कहा गया कि सरकार की ओर से भूस्खलन को रोकने के लिये जो कदम उठाये गये वह नाकाफी हैं। दीर्घकालिक उपचार नहीं किये जा रहे हैं। इसके बाद अदालत ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिये कि वह शपथपत्र के माध्यम से अपनी आपत्ति पेश करे। इस मामले में अगली सुनवाई 29 दिसंबर को होगी।

उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय के अधिवक्ता सैयद नदीम खुर्शीद की ओर से एक जनहित याचिका दायर कर कहा गया है कि बलियानाले में हो रहे भारी भूस्खलन से नैनीताल शहर एवं झील के अस्तित्व को खतरा उत्पन्न हो गया है। कई परिवार भूस्खलन की जद में आ गये हैं। इनके विस्थापन की उचित व्यवस्था नहीं की जा रही है।