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BREAKING -डबरी निर्माण में भारी घोटाला : बिना पंचायत प्रस्ताव के ही कार्य पूर्ण, जनधारा समाचार से चर्चा करते हुए सरपंच ने खुद कबूली गलती

BREAKING -डबरी निर्माण में भारी घोटाला : बिना पंचायत प्रस्ताव के ही कार्य पूर्ण, जनधारा समाचार से चर्चा करते हुए सरपंच ने खुद कबूली गलती


किसन लाल विस्वकर्मा 

मगरलोड . यू तो सरकार आम लोगों की समस्याओं को देखते हुए कई सारे योजना लागू करती है।जिसका एजेंसी ग्राम पंचायत होता है तमाम नियम कानून के बावजूद भी, इन कार्यों में किस तरह से घोटाले होते हैं इसकी बानगी ग्राम पंचायत मुड़केरा में देखने को मिलता है। यहां हुए डबरी निर्माण कार्यों में भारी घोटाला हुआ है।

बिना पंचायत प्रस्ताव के ही कार्य पूर्ण कर दिया गया है। इस बात की गलती सरपंच ने खुद जनधारा समाचार से चर्चा करते हुए कबूली है। डबरी खनन के लिए प्रस्ताव पंचायत द्वारा किया गया था। लेकिन सरपंच,सचिव,रोजगार एवं अधिकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से किसी दूसरे जगह पर कार्य पूर्ण करा दिया गया है।
इसी तरह ग्राम मुड़केरा में ऐसा ही,कई मसला है।जिसमे सरपंच,सचिव, रोजगार सहायक,अधिकारी,कर्मचारियों की मिलीभगत से कोरोना काल मे हितग्राहियों को रोजगार देने के एवज में कई लोगो का मस्टररोल में उपस्थिती डालकर पैसा आहरण कर लिया गया है। कुछ हितग्राही ऐसा भी,है जो कोरोना काल मे प्रदेश से बाहर उत्तर प्रदेश में थे,लेकिन उनका हाजरी ग्राम पंचायत के मस्टरोल में डालकर पैसा निकाला गया है.औऱ तो और जिस तारीख को सरपंच की पत्नी राजीव गांधी सेवा केंद्र भवन मुड़केरा के मरम्मत कार्य मे मजदूरी नही,की है लेकिन उनकी हाजरी मस्टरोल में डाला गया है। साथ ही पंचायत में पानी पाईप लाईन की सामाग्री के नाम से 5980रुपया सिन्हा हार्डवेयर सिंगपुर के नाम फर्जी बिल लगाकर 14वे वित्तीय का पैसा निकाला गया है। यह जानकारी जनधारा समाचार को तब मिला जब उसी पंचायत के कुछ पंचों ने सूचना के अधिकारी के अंतर्गत यह दस्तावेज दिखाया।इस सम्बंध में जनपद पंचायत मगरलोड के एसडीओ अश्वनी चतुर्वेदी से पक्ष लिया गया तो पल्ले झाड़ते हुए कहा,की आवेदक हमारे जांच से संतुष्ट नही है।अब जांच के लिए उच्च अधिकारियों को भेजेंगे और गलत पाया जाता है, तो कार्यवाही की,जायेगी। आगे जनपद पंचायत मगरलोड के पीईओ भावेश योगी से चंद ही सवाल किया ही जा रहा था औऱ वह अपना चेम्बर छोड़ कर बाहर निकल गये । इससे सीधा सीधा कयास लगाया जा सकता है,कि जनपद के कर्मचारी द्वारा सरपंच को बचाने की कोशिश की जा रही है.औऱ फर्जी हाजरी डाले जाने के सम्बंध में मेट को जिम्मेदार बताया जा रहा है ।जब कि सरपंच कनेसिंग वट्टी ने अपना गलती स्वीकार किया है। लेकिन आखिर कब गिरेगी फर्जी काम करने वाले जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारी कर्मचारियों पर गाज ये अपने आप मे बड़ा सवाल बना हुआ है।