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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - साइबर माया ज्यादा खतरनाक

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - साइबर माया ज्यादा खतरनाक

-सुभाष मिश्र

बाबा कबीर कह गये हैं- माया महा ठगनी हम जानी। कबीर साहब के जमाने में इंटरनेट नहीं था, इसलिए ऑनलाइन ठगी नहीं होती थी लेकिन ऑफलाईन ठग और ठगी दोनों अस्तित्व में थे। माया तो यूं ही ठगनी है और माया को पाने के चक्कर में लोग बार-बार ठगी का शिकार होते हैं। जम ताड़ा अब पूरे देश दुनिया में विस्तारित हो रहा है। हर जगह ऑनलाईन ठगी होने की खबरें आम बात हो गई है।

हमारे यहां ठगी के मनोविज्ञान से एक बात अवश्य गहराई से जुड़ी है और वो चीज है मुफ्त या सस्ते में किसी चीज को पाने की हसरत का होना। अनेक फ्रॉड कंपनियां, फ्रॉड लोग आपकी जेब से आपकी खून-पसीने की कमाई झटकने सस्ती दरों पर चीजों की सप्लाई करने का, आपकी सहायता करने का लालच देते हैं और आप में से ज्यादातर लोग ऐसे लोगों के झांसे में आकर अपने आप को लुटा बैठते हैं।

आज कल ऑनलाईन गेम और लॉटरी का चलन भी बहुत है। इंसान बिना हाथ-पांव चलाये, श्रम किए बगैर रातों-रात अमीर होना चाहता है। ऐसे लोगों पर ऑनलाईन ठगों की निगाह रहती है। वो आपको लालच देंगे और आप उनके जाल में अपनी लापरवाही के चलते फंस सकते हैं। यह लूट ठगी इतने कम समय में इतनी चालाकी से होती है कि आपको पता ही नहीं चलता और जब पता चलता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। ये चोर अटरिया पर नहीं आकाश मार्ग से आता है। इसलिए आप ये भी नहीं कह सकते कि आया आया अटरिया पर कोई चोर।  

ज्यादातर युवा हैं जो ऑनलाइन गेम, सोशल मीडिया और इंटरनेट सर्फिंग का उपयोग करते हैं। इंटरनेट के ज्यादा इस्तेमाल से साइबर हैंकिंग का खतरा काफी बढ़ जाता है। हैकर्स फर्जी लिंक बनाकर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे थे। साइबर हैंकिंग कैसे, क्या है और ऑनलाइन फ्रॉड से कैसे बचा जा सकता है।
साइबर एक्सपर्ट मोनाली गुहा बताती हैं कि साइबर सिक्योरिटी साइबर एथिक्स आज के समय में युवा ज्यादातर अपना समय मोबाइल में ही व्यतीत करते हैं। ऑनलाइन गेम्स हो या इंटरनेट सर्फिंग या पढ़ाई के लिए युवा ज्यादातर इंटरनेट का उपयोग करते हैं। इस दौरान हम अपनी पर्सनल जानकारी इंटरनेट में डाल देते हैं। जिस वजह से जो डाटा है वह सार्वजनिक हो जाता है। जिसके बाद कोई भी उसे इस्तेमाल कर सकता है। अगर मोबाइल और लैपटॉप में एंटीवायरस नहीं डलवाया गया है तो सिस्टम से आपटा डाटा लीक हो सकता है। कई लोग आपके डाटा का इस्तेमाल आपको ब्लैकमेल करने में भी यूज करते हैं। जिसे साइबर क्राइम कहा जाता है। इंडिया में एंटीवायरस के बारे में लोग बहुत कम जानते हैं।

साइबर क्राइम के अंतर्गत जिन शब्दों का सर्वाधिक उपयोग होता है उसमें पासवर्ड, ईमेल, हैंकिंग, साइबरफिशिंग जैसे शब्द का उपयोग होता है। साइबर फिशिंग के अंतर्गत किसी के पास स्पैम ईमेल भेजना ताकि वो अपनी निजी जानकारी दें और उस जानकारी से उसका नुकसान हो सके।  

वायरस केवल कोरोना का ही नहीं होता। कम्प्यूटर में भी बहुत तरह के वायरस होते हैं।  जिनमें से कुछ वायरस फैलाए जाते हैं। साइबर अपराधी कुछ ऐसे सॉफ्टवेयर आपके कम्प्यूटर पर भेजते हैं जिसमें वायरस छिपे हो सकते हैं, इनमें वायरस, वर्म, टार्जन हॉर्स, लॉजिक हॉर्स आदि वायरस शामिल हैं। यह आपके कंप्यूटर को काफी हानि पहुॅचा सकते हैं। साइबर क्राइम के अंतर्गत सॉफ्टवेयर पाइरेसी भी एक तरह का अपराध है जिसके जरिए सॉफ्टवेयर की नकल तैयार कर सस्ते दामों में बेचना भी आता है। इससे साफ्टवेयर कम्पनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।  

बढ़ते साइबर क्राइम में फर्जी बैंक कॉल का भी बड़ा रोल है। जाली ईमेल, मैसेज या फोन कॉल करके पूछा जाता है कि आपके एटीएम नंबर और पासवर्ड की आवश्यकता है और यदि आपके द्वारा यह जानकारी नहीं दी गई तो आपको खाता बंद कर दिया जायेगा या इस लिंक पर सूचना दें। बैंक द्वारा ऐसी जानकारी कभी भी इस तरह से नहीं मांगी जाती है किन्तु लोग कई बार ऐसी जानकारी दे देते हैं। सोशल नेटवर्किंग साइट आजकल सामाजिक, वैचारिक, धार्मिक और राजनैतिक अफवाह फैलाने का काम ज्यादा करते हैं।

सुरक्षित डिजिटल पेमेंट इको-सिस्टम प्रदान करने और साइबर धोखाधड़ी के कारण होने वाले वित्तीय नुकसान को रोकने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 155260 और रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म का संचालन शुरू किया है। राष्ट्रीय हेल्पलाइन और रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म, साइबर धोखाधड़ी में नुकसान उठाने वाले व्यक्तियों को ऐसे मामलों की रिपोर्ट करने के लिए एक तंत्र की सुविधा देता है, ताकि उनकी गाढ़ी कमाई की हानि को रोका जा सके। वर्तमान में हेल्पलाइन नंबर 155260 के साथ इसका उपयोग सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (छत्तीसगढ़, दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश) द्वारा किया जा रहा है, जो देश की 35 प्रतिशत से भी अधिक आबादी को कवर करते हैं।

साइबर बुलिंग के जरिए फेसबुक जैसी सोशल नेटवर्किंग पर अशोभनीय कमेंट करना, इंटरनेट पर धमकियां देना किसी का इस स्तर तक मजाक बनाना कि तंग हो जाये, इंटरनेट पर दूसरों के सामने शर्मिंदा करना, इसे साइबर बुलिंग कहा जाता है।  फि़शिंग की घटनाओं की संख्या में हुई वृद्धि को देखते हुए और इन पर अंकुश लगाने के लिए विभिन्न उपाय जैसे कि इनके विरुद्ध कानून, उपयोगकर्ता प्रशिक्षण, सार्वजनिक जागरूकता और तकनीकी सुरक्षा को सुदृढ़ करना आदि को अपनाया जा रहा है।