National Lok Adalat नेशनल लोक अदालत में 841 न्यायालय में पेंडिंग प्रकरण एवं 1473 प्रीलिटिगेशन प्रकरण

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National Lok Adalat नेशनल लोक अदालत में 841 न्यायालय में पेंडिंग प्रकरण एवं 1473 प्रीलिटिगेशन प्रकरण

National Lok Adalat धमतरी !  के.एल.चरयाणी, जिला एवं सत्र न्यायाधीश, अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण धमतरी के निर्देशन में जिला न्यायालय धमतरी एवं बाह्य न्यायालय कुरूद एवं नगरी एवं राजस्व न्यायालयों में 12 नवम्बर को नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया !

जिसमें न्यायालय में लंबित प्रकरणों में से दांडिक प्रकरण के 147 मामले, श्रम न्यायालय के 8 मामले में 119800 रू. मोटर दुर्घटना दावा प्राधिकरण के 17 मामले में 5450000 रू. परिवार न्यायालय 27 मामले धारा 138 एन.आई. एक्ट के 20 मामले में 2590039 रू., सिविल के 6 मामले में 1196000 रू. पीटि अफेन्स के 229 मामले में 217700 रू. ट्रैफिक चालान के 387 मामले में 160500 रू. कुल 841 लंबित प्रकरणों का निराकरण कर 9734039 रू का सेटलमेंट किया गया। साथ ही साथ प्रीलिटिगेशन एवं राजस्व न्यायालयों के 1473 प्रकरणों में 3291373 रू. का सेटलमेंट किया गया। इस प्रकार कुल 2314 प्रकरण में 13025412 रू. का सेंटलमेंट किया गया।

National Lok Adalat इस हाईब्रिड नेशनल लोक अदालत के सफल आयोजन हेतु सभी माननीय न्यायाधीशगण, सभी राजस्व न्यायालयों के अधिकारीगण, अधिवक्तागण, न्यायालयीन कर्मचारीगण, राजस्व एवं विधिक सेवा प्राधिकरण के कर्मचारियों का विशेष योगदान रहा।

6 वर्ष बाद मिले पति-पत्नी

National Lok Adalat कुटुम्ब न्यायालय में एक ऐसे मामले में जिसमें पति-पत्नी का आपस में विवाद के बाद अलगाव की स्थिति निर्मित हो गई थी। परिवार न्यायाधीश विनोद कुमार देवांगन की न्यायालय में मामला प्रस्तुत होने पर उन्होंने विधिवत् मामले की सुनवायी शुरू की विवाद के प्रारम्भिक तथ्यों पर गौर करने पर उन्होंने पाया कि मामला हल्के किस्म का है और विवाद की वजह कोई गम्भीर नहीं है। उन्होंने पति-पत्नि को पृथक-पृथक समझाईश दी और पारिवारिक विवाद के मामले का सुलह-समझौते से राजीनामा के माध्यम से निराकरण किया।

National Lok Adalat 9 जून 2022 को आवेदिका द्वारा धारा- 125 दण्ड प्रक्रिया संहिता के अन्तर्गत कुटुम्ब न्यायालय धमतरी में आवेदन पेश किया। आवेदिका, का विवाह अनावेदक के साथ लगभग 6 वर्ष पूर्व संपन्न हुआ था। विवाह के पश्चात आवेदिका, अनावेदक के साथ दाम्पत्य जीवन का निर्वाहन करते हुए सयुक्त परिवार में रहने लगी। सास ससूर देवर पति सब एक साथ रहते थे।

विवाह के आठ दिन बाद ससुर का एक्सीडेट हो गया। आवेदिका अपने ससूर का पिता की जैसे देखभाल कर रही थी। विवाह के एक दो माह तक सब कुछ ठीक-ठाक चलता रहा किंतु कुछ समय बाद आवेदिका एवं अनावेदक के मध्य कुछ गलतफहमी के कारण अक्सर विवाद होने लगा जो बढ़कर अलगाव में तब्दील हो गया और मामला न्यायालय में पहुंच गया।

National Lok Adalat तब कुटुंब न्यायालय के  विनोद कुमार देवांगन न्यायाधीश  द्वारा को काफी अच्छे से, अपासी रिश्तों, परिवार की महतता तथा पति-पत्नी की एक दूसरे के प्रति विश्वास, समर्पण की भावनाओं की गहराईयों को समझाते हुए सुलह-समझाईश दी गयी, समझाईश के दौरान उन्हे समझाया गया कि छोटी-छोटी बातो को लेकर लड़ाई झगड़ा करना नही चाहिये !

National Lok Adalat इसे आपस में मिलकर सुलझा लेना चाहिये, तब आवेदक एवं अनावेदक नेशनल लोक अदालत में पुन: दाम्पत्य जीवन का निर्वाह करने का राजीनामा आवेदन पेश कर एक साथ रहने को राजी हो गये और इस प्रकार दोनो लगभग 6 वर्षों से पृथक रह रहे दंपत्ति का 1 दाम्पत्य जीवन पुन: प्रारंभ हो गया और नेशनल लोक अदालत का सार्थकता में एक और कड़ी जुड़ गयी। सार यह है कि मामूली बातों में बढ़कर विवाद न्यायालय तक पहुंचा विद्यान न्यायाधीश की समझाईश पर मामले का पटक्षेप नेशनल लोक अदालत में राजीनामा से हुआ।

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