National Lok Adalat राजनांदगांव जिले में नेशनल लोक अदालत का हुआ आयोजन

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के एस ठाकुर

National Lok Adalat वर्चुअल और वास्तविक उपस्थिति मोड से 19 हजार 563 प्रकरण से अधिक मामले निपटाए गए

National Lok Adalat राजनांदगांव ! राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली के तत्वावधान छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के निर्देशन एवं जिला न्यायाधीश व अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण राजनांदगांव श्री विनय कुमार कश्यप के निर्देशन में जिले में नेशनल लोक अदालत का वर्चुअल और वास्तविक उपस्थिति मोड में आयोजन किया गया। जिला न्यायाधीश व अध्यक्ष  विनय कुमार कश्यप के नेतृव्व में लोक अदालत के आयोजन की सभी तैयारी पूर्ण कर ली गयी थी।

सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर न्यायालयों में लंबित प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिए राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इसमें सर्वोच्च न्यायालय से लेकर तहसील स्तर तक के न्यायालयों में लोक अदालत आयोजित हुई। जिला राजनांदगांव, नवीन जिला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी एवं जिला खैरागढ़-छुईखदान- गण्डई में 2 हजार 1671 प्रकरणों को निराकरण के लिए चिन्हित किया गया। नेशनल लोक अदालत आयोजित करने के लिए कुल 44 खंडपीठों का गठन किया गया था। इस लोक अदालत में 19 हजार 563 मामलों का सफलतापूर्वक निपटान किया गया।

National Lok Adalat निपटान किए गए मामलों में कुल 17 हजार 891 मामले प्री-लिटिगेशन चरण के थे और 1648 मामले ऐसे थे जो विभिन्न न्यायालयों में लंबित थे। निपटान राशि लगभग 4 करोड़ 33 लाख 61 हजार 396 रूपए थी।

नेशनल लोक अदालत में आपराधिक राजीनामा योग्य मामले, मोटर वाहन दुर्घटना दावा से संबंधित मामले, धारा 138 एनआई एक्ट से संबंधित मामले यानि चेक के संबंधित मामले, वैवाहिक विवाद के मामले, श्रम विवाद के मामले, बैंक ऋण वसूली वाद, रूपए वसूली वाद, विद्युत बिल एवं टेलीफोन बिल के मामले, भूमि अधिग्रहण से संबंधित मामले, राजस्व न्यायालय के मामले एवं अन्य राजीनामा योग्य वाद आदि से संबंधित मामलों की सुनवाई की गई।

सफल कहानी

जिला न्यायाधीश राजनांदगांव विनय कुमार कश्यप के न्यायालय में लंबित सिविल वाद प्रकरण 22ए/21 सम्पतलाल/गीता शुक्ला जो 15 सितम्बर 2021 से स्थायी निषेधाज्ञा के आदेश हेतु प्रस्तुत किया गया था। सिविल वाद में गीता शुक्ला द्वारा ग्राम मुढिय़ा तहसील डोंगरगढ़ जिला राजनांदगांव की भूमि का विक्रय सम्पतलाल पारख के पक्ष किए जाने का सौदा 52 लाख 90 हजार रूपए हुआ था। जिस हेतु न्याय शुल्क 2 लाख 18 हजार 500 रूपए किन्तु भूमि का पंजीयन नहीं हो पाने के कारण सौदा निरस्त हो गया।

National Lok Adalat प्रकरण को नेशनल लोक अदालत में राजीनामा हेतु रखा गया। जिसमें पक्षकारों के मध्य राजीनामा इस शर्त पर हुआ कि वादग्रस्त भूमि के संबंध में प्रतिवादी द्वारा प्राप्त की गई बयाना राशि 5 लाख रूपए के अतिरिक्त राशि 75 हजार रूपए कुल राशि 5 लाख 75 हजार रूपए आदेश से एक सप्ताह के भीतर वादी सम्पतलाल को प्रतिवादी अदा करेगी ।

प्रकरण नेशनल लोक अदालत के माध्यम से निराकृत होने से वादी के द्वारा वाद शुल्क के रूप में अदा की गई राशि 2 लाख 18 हजार 500 रूपए वादी को वापस किए जाने हेतु न्यायालय द्वारा डिक्री पारित की गई। इस प्रकार वादी एवं प्रतिवादी के मध्य लंबित उक्त सिविल वाद का निराकरण नेशनल लोक अदालत के माध्यम से राजीनामा के आधार पर समाप्त हो गया तथा दोनों पक्षकार राजी-खुशी न्यायालय से विदा हुए।

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