27.2 C
Chhattisgarh

Judge मुखरता के लिए मशहूर जज

UncategorizedJudge मुखरता के लिए मशहूर जज

Judge मुखरता के लिए मशहूर जज

विनीत नारायण

Judge मुखरता के लिए मशहूर जज

Judge जब भी कभी किसी के बीच कोई विवाद उठता है, और वो लोग किसी नतीजे पर नहीं पहुंचते तो अदालत का रुख करते हैं।

https://jandhara24.com/news/109790/the-dead-body-of-the-middle-aged-found-in-the-breaking-kachana-pond-sensation-spread-in-the-area/
Judge ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जनता को न्यायालयों पर पूरा विश्वास है परंतु भारत के न्यायतंत्र में लंबित मामलों की संख्या लगभग पांच करोड़ के पार चली गई है। हाल ही में देश के कानून मंत्री ने संसद में कहा कि यदि कोई जज 50 मामलों का निपटारा करता है, तो 100 और नये मामले दर्ज हो जाते हैं। देश के न्यायालयों में जजों की संख्या कम है, और मामलों की काफी अधिक। ऐसे में न्याय मिलने की बजाय वादी को मिलती है तो सिर्फ एक नई तारीख।

Judge कोविड महामारी ने दुनिया भर में ‘ऑनलाइन’ कार्य को काफी बढ़ावा दिया और इससे संसाधनों की काफी बचत भी हुई। शुक्रवार को रिटायर हुए देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एन वी रमना ने अपना पद संभालने के कुछ ही हफ्तों में इस बात पर काफी जोर दिया था कि सर्वोच्च न्यायालय में होने वाली सुनवाई का सीधा प्रसारण किया जाना चाहिए।

Judge जस्टिस रमना के अनुसार ऐसा करना इसलिए उचित रहता क्योंकि अदालत में हुई सुनवाई जनता तक बिना किसी निहित स्वार्थ के सेंसर किए पहुंचती। उन्होंने मुकदमों की मीडिया रिपोर्टिग पर सवाल उठाते हुए कहा था कि कई बार संदर्भ से हटकर खबरें छाप दी जाती हैं। इसलिए यदि कोर्ट की सुनवाई का सीधा प्रसारण किया जाए तो वो जनता के हित में ही होगा।

Judge आज तकनीक का कमाल है कि हम घर बैठे आराम से शॉपिंग कर लेते हैं। कोविड महामारी के चलते जब कोर्ट में केवल ऑनलाइन सुनवाई हो रही थी तब कोर्ट की कार्यवाही नहीं रु की, बल्कि लोग अपने घरों से ही कोर्ट की सुनवाई में शामिल होते थे। ऐसे में अदालतों की सुनवाई यदि अधिक से अधिक ऑनलाइन तरीके से होती है, तो इसके कई फायदे होते हैं। यदि कोर्ट की सुनवाई का सीधा प्रसारण भी हो तो कोर्ट में फालतू की भीड़ भी नहीं लगेगी।

Judge अदालत की कार्यवाही को कवर करने वाले पत्रकारों को भी इसका लाभ पहुंचेगा। किसी भी उच्च न्यायालय या उस न्यायालय में, जहां एक से अधिक कोर्ट रूम होते हैं, पत्रकारों की दिक्कत तब बढ़ जाती है, जब एक से अधिक खास मामले दो अलग-अलग कोर्ट में चल रहे होते हैं। यदि सुनवाई का सीधा प्रसारण हो और वो सुनवाई के बाद भी देखा जा सके तो सुनवाई की खबर लिखने में आसानी हो जाती है।

Oil pulling : रोज करना चाहिए ऑयल पुलिंग
इससे पहले रांची में एक भाषण के दौरान जस्टिस रमना ने कहा था, ‘न्याय से जुड़े मुद्दों पर गलत सूचना और एजेंडा चलाना स्वस्थ लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।’ तब मुख्य न्यायधीश जस्टिस रमना की इस पहल को सभी ने सराहा था। उनके कार्यकाल के आखिरी दिन भारत के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का सीधा प्रसारण देखने को मिला। इस सुनवाई को एक ‘सेरिमोनियल बेंच’ का नाम दिया गया।

इस सुनवाई में शुरु आती दौर में जरूरी मामलों की अगली तारीख तय करने संबंधित कार्यवाही हुई। इसके पश्चात न्यायमूर्ति रमना को अधिवक्ताओं द्वारा विदाई देने की प्रक्रिया शुरू हुई। सीधे प्रसारण में वकीलों से खचाखच भरी हुई कोर्ट नम्बर एक का नजारा देखने लायक था। कोर्ट रूम के अलावा कई वरिष्ठ अधिवक्ता ऑनलाइन रूप से भी जुड़े हुए थे। एक-एक करके कभी कोर्ट रूम से तो कभी ऑनलाइन मोड से सभी जस्टिस रमना को उनकी शानदार पारी के लिए बधाई दे रहे थे।

विदाई देते हुए अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि आपके रिटायरमेंट से हम एक बुद्धिजीवी और एक उत्कृष्ट न्यायाधीश खो रहे हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि आपने अपने परिवार के अलावा वकीलों और जजों के परिवारों का भी खास ख्याल रखा। वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने जस्टिस रमना की कार्यशैली की तारीफ करते हुए उनके द्वारा लिए गए फैसलों और उनके 16 महीने की अवधि दौरान अदालत के कामकाज में किए गए बड़े सुधारों के लिए भी याद किया।

उन्होंने अपने कार्यकाल में जजों की रिक्त पदों को भरने का काम किया। उनके कार्यकाल में जिला अदालतों और हाई कोर्ट्स में जजों की संख्या में भी इजाफा किया गया। उन्होंने ‘जज-टू-पॉपुलेशन रेश्यो’ की बात की और कहा कि इसी तरीके से केस लोड को कम किया जा सकता है। एन वी रमना के कार्यकाल में 15 हाई कोर्ट्स के चीफ जस्टिस भी नियुक्त हुए हैं।

Judge अधिवक्ताओं द्वारा दिए गए विदाई संदेशों में कई महिला वकीलों ने भी जस्टिस रमना को उनके द्वारा महिला वकीलों के लिए उठाए गए महत्त्वपूर्ण कदमों के लिए याद किया और आभार व्यक्त किया।

Judge मुख्य न्यायधीश की अदालत में उस समय भावुक माहौल बन गया जब वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे जस्टिस रमना को जनता का जज बताते हुए अपनी बात कहते-कहते रो पड़े। वे बोले, ‘मैं आज अपनी भावनाओं को रोक नहीं रख सकता। आपने रीढ़ के साथ अपना कर्त्तव्य निभाया। आपने अधिकारों को बरकरार रखा, आपने संविधान को बरकरार रखा, आपने जांच और संतुलन की व्यवस्था बनाए रखी।

Judge मुझे बहुत संतोष है कि आपका आधिपत्य न्यायमूर्ति ललित के हाथों में अदालत छोड़ रहा है। हम आपको मिस करेंगे।’ मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने अपने कार्यकाल के दौरान 225 न्यायिक अफसरों और हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति की सिफारिश भी की।

जस्टिस रमना के कार्यकाल के दौरान सुप्रीम कोर्ट में 11 जजों की नियुक्ति की गई। इनमें महिला जज सुश्री बीवी नागरत्ना भी शामिल हैं। 2027 में वे देश की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश होंगी।

Judge जस्टिस रमना को उनकी मुखरता के लिए भी जाना जाएगा। उनके एक बयान की काफी चर्चा हुई थी, जिसमें उन्होंने कहा था, ‘मैं नेता बनना चाहता था, लेकिन न्यायिक क्षेत्र में आ गया।’

अपने कार्यकाल में जस्टिस रमना के सामने कई अहम मामले आए जो सुर्खियों में रहे। इनमें राजद्रोह मामला, बिलकिस बानो गैंग रेप मामला, पेगासस मामला, ईडी के निदेशक की सेवा विस्तार का मामला और शिवसेना पर अधिकार मामला आदि थे। आने वाले समय में यह देखना होगा जिन अहम मामलों की सुनवाई पूरी किए बिना जस्टिस रमना सेवानिवृत्त हो गए, उन पर भविष्य के मुख्य न्यायधीशों का क्या रु ख रहने वाला है।

Check out other tags:

Most Popular Articles