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Drought again in Jharkhand झारखंड में फिर सूखा

Drought again in Jharkhand झारखंड में फिर सूखा

Drought again in Jharkhand  हाय-तौबा मचती है तो होती है राहत की घोषणा 

Drought again in Jharkhand हालात ये हैं कि जब-जब सूखा पड़ता है, हाय-तौबा मचती है तो राहत की घोषणा होती है और लंबी-चौड़ी कार्ययोजना बनती है। फिर कुछ दिन बाद सब लोग भूल जाते हैं।

Drought again in Jharkhand अगर आज भी लोगों की मुसीबत राजनीति और मीडिया के एजेंडे में होती, तो देश के ज्यादातर लोग इस बात से वाकिफ होते कि झारखंड के लोगों को इस समय सूखे की कैसी मार झेलनी पड़ रही है। लेकिन इस बात की चर्चा झारखंड के बाहर शायद ही हुई हो।

हकीकत यह है कि अलग राज्य बनने से अब तक झारखंड करीब दस बार सूखे की मार झेल चुका है। इसके बावजूद इन 22 वर्षों में सूखे से निपटने और जल प्रबंधन की दिशा में ना तो कोई कारगर कदम उठाया गया और ना ही सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था हो सकी।

Drought again in Jharkhand अगर ऐसा हुआ होता, तो लोगों को बार-बार एक जैसी परेशानी से ही नहीं गुजरना पड़ता। हालात ये हैं कि जब-जब सूखा पड़ता है, हाय-तौबा मचती है तो राहत की घोषणा होती है और लंबी-चौड़ी कार्ययोजना बनती है। फिर कुछ दिन बाद सब लोग भूल जाते हैं। जबकि राज्य में खेती की ज्यादातर जमीन अब भी बारिश के पानी पर ही सिंचाई के लिए निर्भर है।

इस साल पूर्वी सिंहभूम और सिमडेगा जिले को छोड़ कर राज्य के 24 जिलों में 22 के 226 प्रखंडों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया। अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकार की बैठक में कृषि विभाग की तरफ से जमीनी आकलन के बाद तैयार की गई रिपोर्ट के आधार पर इन्हें सूखाग्रस्त माना गया है। घोषणा हुई है कि राज्य सरकार तत्काल राहत के तौर पर प्रत्येक किसान परिवार को 3,500 रुपए देगी।

Drought again in Jharkhand किसानों को दी जाने वाली राहत पर करीब 1200 करोड़ की राशि खर्च होने का अनुमान है। 30 लाख से अधिक किसानों को इसका लाभ मिलेगा। जिन जिलों में 15 अगस्त तक 33 फीसद से कम क्षेत्र में धान की बुआई या रोपनी हुई, उसे सूखाग्रस्त घोषित किया गया।

बारिश की स्थिति को देखते हुए विभिन्न जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग जुलाई में ही कई जिलों से उठने लगी थी। जुलाई के महीने तक 58 प्रतिशत कम बारिश हुई थी और बमुश्किल धान की दस प्रतिशत रोपनी हो सकी थी। सवाल यह है कि क्या इस समस्या का कोई दीर्घकालिक हल नहीं हो सकता?

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