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(computer vision syndrome) कंप्यूटर विजन सिंड्रोम: जानिए इसके कारण, लक्षण और इलाज

(computer vision syndrome)

(computer vision syndrome) कंप्यूटर विजन सिंड्रोम

(computer vision syndrome) आजकल युवाओं में आखों में रुखेपन की समस्या अधिक देखने को मिल रही है। इसका प्रमुख कारण कंप्यूटर विजन सिंड्रोम (सीवीएस) है और यह डिजिटल एक्सपोजर के कारण होता है। इससे हमारी आंखों पर दबाव पड़ता है और समय रहते इस पर ध्यान न देने से यह गंभीर रोगों का कारण बन सकता है। विश्व स्तर पर सीवीएस लगभग 60 लाख लोगों को प्रभावित करता है। आइए आज सीवीएस के कारण, लक्षण और इलाज के बारे में जानते हैं।

सीवीएस आंखों को कैसे प्रभावित करता है?

(computer vision syndrome) सीवीएस को डिजिटल आई स्ट्रेन के रूप में भी जाना जाता है और यह समस्या डिजिटल गैजेट्स का इस्तेमाल करते समय पलकें कम झपकने के कारण होती है। पलकों के कम झपकने से आंखों में नमी बनाए रखने का काम करने वाली ऑइल ग्लैंड की कार्य क्षमता प्रभावित होती है। इसके परिणामस्वरूप आंखों में रूखापन बढऩे लगता है। इसके अतिरिक्त इससे आंखों का तनाव बढ़ता है और आंखों की रोशनी भी प्रभावित होने लगती है।

क्या है सीवीएस के प्रमुख कारण?

कम रोशनी वाली जगह पर लंबे समय तक डिजिटल गैजेट्स का इस्तेमाल करने या स्क्रीन के बहुत नजदीक रहने से इस सिंड्रोम का खतरा बढ़ जाता है। डिजिटल गैजेट्स का इस्तेमाल करते समय शारीरिक स्थिति सही न होना, बिना ब्रेक के लगातार स्क्रीन को देखते रहना और एंटी ग्लेयर चश्मा न लगाना भी इस समस्या के कारण हैं। इसी तरह बढ़ती उम्र भी सीवीएस के खतरे के लिए जिम्मेदार हो सकती है।

क्या हैं सीवीएस के प्रमुख लक्षण?

(computer vision syndrome) आंखों में धुंधलापन आना या डबल चीजें दिखाई देना, आंखों में थकान और जलन महसूस होना सीवीएस के मुख्य लक्षण हैं। इसके अलावा आंखों का रूखापन, आंखों में लालिमा और पानी आना, सिरदर्द, पीठ या गर्दन में दर्द होना भी इस समस्या के आम लक्षण हैं। अगर आप इनमें से किसी भी समस्या का अनुभव कर रहे हैं तो आपको किसी अच्छे आंखों के डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

सीवीएस का इलाज और बचाव के उपाय

चिकित्सकों के अनुसार, सीवीएस से बचने के लिए चश्मा या कॉन्टैक्ट लेंस का इस्तेमाल करने के साथ स्क्रीन टाइम कम करना चाहिए। इसी तरह कंप्यूटर, फोन और टैबलेट स्क्रीन पर एंटी-ग्लेयर स्क्रीन फिल्टर या मैट स्क्रीन फिल्टर लगानी चाहिए। डिजिटल गैजेट्स का इस्तेमाल करते समय हर दो घंटे के बाद लगभग 15 मिनट के लिए ब्रेक भी आवश्यक है। स्क्रीन के पास ह्यूमिडिफायर रखें और समय-समय पर आंखों की जांच करवाएं। पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करें।

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