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Bhanupratappur Special News : पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर विधिवत पूजन से सभी मनोरथ पूरी

Chhattisgarh NewsBhanupratappur Special News : पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर विधिवत पूजन से सभी मनोरथ पूरी

Bhanupratappur Special News : पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर विधिवत पूजन से सभी मनोरथ पूरी

Bhanupratappur Special News : पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर विधिवत पूजन से सभी मनोरथ पूरी

संगीतमय शिवपुराण के सातवें दिवस की कथा।

Bhanupratappur Special News : भानुप्रतापपुर। संगीतमय शिवपुराण कथा के सातवें दिवस आज रविवार को पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर विधिवत पूजन अर्चना से मिलने वाले मनोरथ को पंडित जी ने विस्तार पूर्वक बताया है।

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आचार्य अनिल जी महाराज ने कहा है कि आप लोग जो प्रति दिन मिट्टी के पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर पूजन का महत्व। शिवपुराण कहता है यदि कोई बालक,बालिका पढ़ने में कमजोर है मन नही लगता है

तो 1100 पार्थिव शिवलिंग निर्माण कर विधिवत पूजा अर्चना करने से निवारण हो जागेगा।

सम्पत्ति व्यापार के उन्नति के लिए 500 पार्थिव शिवलिंग का निर्माण, संतान प्राप्ति के लिए 1500 पार्थिव शिवलिंग का निर्माण, वस्त्र आभूषण के लिए पार्थिव शिवलिंग का निर्माण,

मोक्ष प्राप्ति के लिए तीन माह के भीतर सवा करोड़ पार्थिव शिवलिंग का निर्माण, भूमि, मकान इत्यादि के लिए 1000
पार्थिव शिवलिंग का निर्माण, यदि कोई ईश्वर की दया कृपा के लिए 60 हजार पार्थिव शिवलिंग का निर्माण, दीर्घायु के लिए एक महीने के भीतर सवा लाख पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर विधिवत श्रद्धा के साथ पूजन करने पर मनोकामना पूरी होती है।

आज की कथा के दौरान आचार्य जी ने बताया कि शिव पूजन करने से एक अश्वमेध ज्ञय की फल प्राप्ति होती है, जीवन मे कभी प्राणी को पीडा नही होती है। प्रत्येक ब्राह्मण को वेदमाता गायत्री माता का पूजन करना चाहिए।

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जब मनुष्य की उम्र 60 वर्ष पूर्ण कर लिए है उन्हें अपना जीवन ईश्वर में लगा लेना चाहिए क्यो यही से मनुष्य का चौथा चरण प्रारंभ होता है, गवर्नमेंट भी रिटायर्ड कर देती है। मनुष्य हमेशा अपनी गलती भगवान को सौपता है,

सुदामा गरीब था लेकिन दरिद्र नही लेकिन यह सब कर्म का प्रतिफल है। ईश्वर सदैव आपके पास है, मनुष्य ही नही देख पाता है।

जिस किसी ब्यक्ति ने अपने जीवन मे कभी भी दान,पूण्य,सत्संग कीर्तन नही किया है भगवान गणेश जी का वरदान है कि यदि वे क्षण भर भी शिवपुराण की कथा सुन लेता है तो उसकी भी नैया पार हो जाती है।

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वही शमशान को शिव जी का क्रीड़ा स्थल कहा गया है, शम-शान का तात्पर्य शांत व सभी के लिए समान बताया गया है। हिन्दू सनातन में चंदन की महिमा, दीपदान का महत्व में सुरनिधि की कथा सहित गणेश विवाह संपन्न हुआ।

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