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A.T. Builders : ए.टी. प्लाजा और ए.टी क्लासिक के मकान खरीदकर पछता रहे हैं लोग

A.T. Builders :  ए.टी. प्लाजा और ए.टी क्लासिक के मकान खरीदकर पछता रहे हैं लोग

रायपुर. चमकदार ब्रोसर और पम्पलेट के जरिये लोगों को आकर्षित कर बड़े बड़े बिल्डर्स ने आम जनता के गाढ़ी कमाई पर डाका डाला है। ऐसे आम लोगों से लोकलुभावन वादे करके मोटी रकम वसूलने वाले बिल्डरों ने राजधानी रायपुर शहर में कई प्रोजेक्ट में वादाखिलाफी का गोरखधंधा खोल रखा है। ताज़ा मामला अनोपचन्द-तिलोकचन्द बिल्डर का सामने आया है. राजधानी के शंकरनगर स्थित ए.टी प्लाजा और खम्हारडीह रेलवे क्रासिंग के पास नवनिर्मित ए.टी क्लासिक के रहवासियों ने कंपनी पर घटिया क्वालिटी का मकान बेचने का आरोप लगाया है.

उल्लेखनीय है कि एटी जेवलर्स ने रायपुर के सदर बाज़ार सहित छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में अपना कारोबार का फैला रखा है। सालों पहले उन्होंने गृह निर्माण के क्षेत्र में कदम रखा है. उनका दावा है कि वे उच्चतम गुणवत्ता वाले मकान बनाते हैं. इन्हीं में से एक है  ए.टी क्लासिक. खम्हारडीह रेलवे क्रासिंग के पास नवनिर्मित ए.टी क्लासिक के नाम से रिहायशी फ्लैट का निर्माण कुछ साल पहले किया है। लेकिन वहां पर रह रहे लोगों ने नाम न छपने की शर्त पर बताया कि उनकी बिल्डिंग में काफी अव्यवस्था का आलम है. आये दिन पाइप लाइन चौक हो जाता है और बारिश के दिनों में सीपेज होकर घरों के अंदर दीवारों में पानी आ जाता है।

पीड़ितों से जब पूछा गया कि क्या आपने इस बारे में बिल्डर्स को कोई जानकारी दी है क्या तो उन्होंने कहा कि बिल्डर अनोपचन्द - तिलोपचन्द ने इस पर कोई सुधार नहीं कराया और कई बार बाथरूम का पाइप लाइन जाम हो जाता है. रहवासियों का कहना है कि कई बार हम लोगों को लगता है एटी क्लासिक में फ़्लैट खरीदकर गलत कर दिया.

  • मकानों में दरार से लेकर सीवरेज और मेंटीनेंस तक की समस्या,
    रीयल इस्टेट रेगुलरिटी अथॉरिटी की भूमिका पर सवाल उठ रहे
बिल्डर की दादागिरी और अवव्यस्था का आलम
इससे भी बुरी स्थित अनोपचद - तिलोपचन्द बिल्डर के ए.टी प्लाज़ा में देखने को मिली. बिल्डर अनोपचन्द तिलोपचन्द ने करीब चौदह वर्ष पहले शंकर पाश एरिया में 27 फ्लैट का निर्माण कराया था और चमकदार ब्रोसर एवं पम्पलेट के जरिये उस फ़्लैट में रह रहे लोगो की गाढ़ी कमाई पर डाका डाला है। इस संवाददाता को मिल रही बार बार शिकायतों के बाद जब हमने पड़ताल की तो बिल्डर अनोपचद - तिलोपचन्द के कारनामे बहुत ही चौकाने वाले निकले.  

शंकर नगर रोड स्थित ए.टी प्लाज़ा में रह रहे लोगों में बिल्डर अनोपचद-तिलोपचन्द की दहशत इतनी है कि कोई उनके बारे में बोलने से डर रहे थे कि कहीं उनका नाम सामने आ जायेगा। जब हमने नाम न छपने का भरोसा दिलाया तब वहां के रहवासियों ने बताया कि हम लोगों को अनोपचद - तिलोपचन्द ने आर्थिक चुना लगाया है। A T प्लाज़ा के रहवासियों ने कहा कि यहाँ पर 27 फ़्लैट हैं और पार्किंग बिलकुल भी न के बराबर है. यदि किसी को इमरजेंसी में अस्पताल जाना है तो वह निकल नहीं पायेगा क्योंकि पार्किंग बहुत छोटी है.
गाड़ी निकल नहीं पाती है.

मेहमानों के लिए किराये का कमरा नही
रहवासी ने बताया कि यहाँ पर ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह फेल है. आये दिन पाइप लाइन जाम हो जाता है। लोगों की पार्किंग के लिए जो जगह था, उसमें भी खुद बिल्डर ने अपने सगे और संबंधियों को दुकानें खोलकर दे दी हैं और बिल्डर अनोपचद-तिलोकचन्द ने जबरदस्ती फ़्लैट के नीचे गोडाऊन खोल दिए हैं। जिसमे एक दुकान का सामान रखा हुआ है और इन दुकानों की वजह से आये दिन चूहा घरो में आकर महंगे-महंगे सामने को नुकसान पहुंचा रहे हैं. साथ ही गंदगी भी कर दे रहे हैं जिससे आये दिन फ्लैटवासी बीमार हो जा रहे  है। रहवासियों का आरोप है कि फ़्लैट को बेचने के लिए बिल्डर अनोपचद-तिलोपचन्द ने लोक लुभावन वादे किये थे जैसे कि यहाँ पर आने वाले मेहमानों के लिए पर 2 बीएचके कमरा आठ सौ और 3 बीएचके का कमरा चौदह सौ रुपए में किराये पर मिलेगा परंतु यह वादा भी फुस्स निकला. एक आरोपी ने यहां तक आरोप लगाया कि बिलडर ने दादागिरी पूर्वक उनके किराया के फ़्लैट का ताला तोड़कर अपना ताला लगाया है।  

शिकायत की तो पानी देना बंद कर दिया
इधर, फ़्लैटवासी इसके विरोध में जब शिकायत करने, कलेक्टर ,निगम कमिश्नर, मुख्यमंत्री के पास जाने के लिए बाकी सदस्यों को कहते हैं तो बिल्डर अनोपचंद-तिलोपचन्द के रिश्तेदार होने के कारण वे लोग साथ नहीं देते हैं और अभी भी सभी के नामों की शिकायत की कॉपी रखी हुई है. करेला नीम चढ़ा की तर्ज पर यह कि एक बार जब फ़्लैट के रहवासियों ने मेंटनेंस फीस देने में देरी कर दी तो बिल्डर अनोपचद-तिलोपचन्द ने घरों में पानी सप्लाई बंद करवा दिया था. इसके विरोध में जब लोग सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किये तब जाकर बिल्डर ने पानी सप्लाई शुरू किया। इसके अलावा बीच बीच में बिल्डर खुद की पहुंच का हवाला देकर शिकायकर्ताओं को शांत करा लेते हैं.

रेरा की भूमिका पर सवाल उठे
बिल्डर की ज्यादतियों पर नजर रखने तथा पीड़ितों को न्याय दिलाने वाली संस्था रीयल इस्टेट रेगुलरिटी अथॉरिटी की भूमिका पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं. बिल्डर की पहुंच को देखते हुए आमतौर पर लोग वहां कम ही शिकायतें करते हैं और जो शिकायतें होती हैं, वह भी ठण्डे बस्ते में पड़ी रहती हैं. राजधानी के कई बिल्डरों से लोग पीड़ित हैं परंतु खुद रेरा अपने स्तर पर ना तो संज्ञान लेता है और ना ही जांच करता है. रेरा से जुड़े अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि कई बिल्डर रेरा के अफसरों के संपर्क में हैं.