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गांधी और आधुनिक भारत सेमिनार में पहुंचे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से सेमिनार में शामिल होने पहुंचे गांधीवादी विचारक

गांधी और आधुनिक भारत सेमिनार में पहुंचे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से सेमिनार में शामिल होने पहुंचे गांधीवादी विचारक

रायपुर, 11 सितंबर। मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्वलित कर सेमिनार का शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम मेंदिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अपूर्वानंद बतौर मुख्य वक्ता शामिल हैं। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी लीलाताई चितले और सर्वोदयी नेता अमरनाथ भाई बतौर विशिष्ट अतिथि शामिल हैं।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गांधी जी को याद करते हुए कहा कि वे जब तक जिंदा थे तब भी लोगों ने उन्हें लिखा और उनके मरने के बाद भी उन्हें लिखा गया है । इतिहास में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसे उनके विरोधियों के द्वारा भी इज्जत दी जाती थी । लोग उनके विचारधारा की इज्जत करते थे। जिस तरह से सत्य और अहिंसा का मार्ग अपनाया था, एक पत्रकार ने उनसे कहा था कि जिस तरह से आप अहिंसा वादी होकर बिना अस्त्र-शस्त्र के केवल उपवास मात्र से लड़ रहे हैं, शायद विश्व में ऐसा पहली बार किसी ने किया है। गांधीजी की लड़ाई भूखे, गरीब, बेसहारा लोग , जिनके पास रहने तक के लिए छत नहीं है और दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं होती है, उनके लिए थी। 

भूपेश बघेल ने कहा कि आज के कार्यक्रम का विषय गांधी और विज्ञान है। लेकिन क्या यह वही भारत है जिसकी कल्पना गांधी जी ने की थी। गांधी जी की परिकल्पना के अनुसार यह देश भेदभाव छुआछूत से मुक्त हो, नारी शक्ति का उत्थान हो, लोग स्वावलंबी  बने, सभी को शिक्षा का समान अधिकार प्राप्त हो, प्रत्येक किसान आर्थिक रूप से संपन्न हो सके।  बघेल ने प्रश्नात्मक ढंग से पूछा कि  क्या हम गांधीजी की परिकल्पना के अनुसार खरे उतरे हैं? क्या हमारे बीच हिंसा और डर का वातावरण नहीं बनाया जा रहा है?  क्या हम देश में सुरक्षित है? 

बघेल ने कहा कि आज बहुत से लोग गांधीवादी के विचार से लेकिन बहुत कम लोग ही उनके रास्ते पर चल रहे हैं। गांधी ने यह नहीं कहा था कि सिर्फ अहिंसा के मार्ग पर चलो, बल्कि उन्होंने कहा था कि जहां कहीं भी अन्याय हो उसके खिलाफ खड़े होने की हिम्मत रखो। आज कितने लोग हैं जो सच की राह पर चलते हैं। लोगों में सही को सही और गलत को गलत कहने का साहस होना चाहिए।

केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाकर सिर्फ अपना चुनावी एजेंडा को पूरा किया है। उसे केंद्र शासित राज्य बनाने से पहले उन्होंने वहां के जनप्रतिनिधियों से बातचीत तक नहीं की, ना ही उनसे पूछना उचित समझा।  

भूपेश बघेल ने सड़कों पर बैठे मवेशियों को लेकर बयान दिया कि छत्तीसगढ़ की सरकार किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए गायों को महत्वपूर्ण कड़ी बनाएगी। जहां गाय को माता का दर्जा दिया जाता है वहां उसकी सुरक्षा एवं देख रहे की पूरी व्यवस्था की जाएगी। सरकार ऐसी व्यवस्था करेगी कि उसके गोबर से भी पैसा बनाया जा सकेगा। अब तक 1.5 हजार गांव में गौठान बनाए जा चुके हैं। ऐसे ही गौठान पूरे प्रदेश में बनाई जाएगी और वहां मवेशियों की चारा पानी की व्यवस्था सुव्यवस्थित रूप से की जाएगी।  सरकार एक हद तक अपनी जिम्मेदारी पूरी कर रही है, इन गौठानो को संचालित करने का काम गांव करेगी। 

ऑटोमोबाइल सेक्टर में आई आर्थिक गिरावट को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे देश में आर्थिक मंदी का असर है लेकिन छत्तीसगढ़ में इसका प्रभाव देखने को नहीं मिल रहा है क्योंकि यहां के किसान आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ शासन के प्रयास से किसानों की समृद्धि दोगुनी हो गई है।

बघेल जी ने नौजवानों को संबोधित करते हुए कहा कि गांधीजी की विचारधारा को पीढ़ी दर पीढ़ी स्थानांतरित करने का काम नौजवानों के कंधे पर ही है। जिस तरह से गांधी जी ने अपने जीवन के 32 साल देश के लिए संघर्ष किया और अंततः अंग्रेजो की गुलामी से आजाद कराया इससे यह तय है कि गांधीजी के मार्ग पर चलने वाले को कठिन दौर से गुजरना पड़ सकता है लेकिन सफलता जरूर मिलती है। सत्य की लड़ाई अहिंसा से ही जीती जा सकती है।

अपूर्वानंद ने सभा को संबोधित करते हुए  कहा- यहां के नौजवानों में जनतंत्र जिंदा है. जिस तरह से गांधी जी को विरोधियों के बीच में थी, शायद ही किसी और व्यक्ति की छवि ऐसी रही है. वीर वह  नहीं है जो खून बहाता है, वीर वह होता है जो सदैव अपना खून बहाने के लिए तत्पर रहता है। देश में बहुत सारे पुरुष ऐसे हैं जो महात्मा गांधी से नफरत करते हैं क्योंकि वे औरतों का काम करते थे। लेकिन इस बात को भूल जाते हैं कि यह वही व्यक्ति है जिसने अपने सीने में तीन गोलियां खाई। जब महाराष्ट्र से पूरा दल गांधी की हत्या करने के लिए आया था और उनकी सभा में बम फेंका गया था तभी उन्होंने अपनी सुरक्षा नहीं बढ़ाई थी। देवघर में जब उनपर हमला हुआ था यह लोग मेरे अपने समुदाय के लोग है। 30 जनवरी से पहले भी उन पर कई हमले हुए थे, जानते हुए कि उनकी जान को खतरा है उन्होंने कहा चिंता नहीं की थी।  आज भारत सरकार के विज्ञापन गांधीजी देखने को मिलते हैं। तस्वीर नहीं बल्कि उनका चश्मा देखने को मिला। यह वही चश्मा है जो गोली लगते वक्त जमीन पर गिर गया था जिसे उठाकर विज्ञापनों की होल्डिंग में लगा दिया गया। गांधी जी को स्वच्छ भारत अभियान का ब्रांड एंबेसडर बनाया गया है।  आज लोगों ने उनकी सीख को भुला दिया हैं। गांधी जी ने सदैव दीन दुखियों और आदिवासियों के हित में कार्य किया लेकिन आज उनकी शिक्षा को दरकिनार करते हैं।