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भीमा-कोरेगांव हिंसा: DU के प्रोफेसर के आवास पर पुणे पुलिस का छापा, नक्‍सलियों से संपर्क होने का संदेह

भीमा-कोरेगांव हिंसा: DU के प्रोफेसर के आवास पर पुणे पुलिस का छापा, नक्‍सलियों से संपर्क होने का संदेह

नई दिल्ली, 10 सितंबर।  भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में पुणे और नोएडा पुलिस की संयुक्‍त टीम ने दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय के प्रोफेसर हनी बाबू के आवास पर छापा मारा है. पुलिसकर्मियों ने नक्‍सलियों से संबंध होने के संदेह पर यह छापेमारी की है. कि वर्ष 2018 में भीमा-कोरेगांव में हिंसा भड़क गई थी. पुलिस को संदेह है कि हिंसा भड़काने के पीछे नक्‍सलियों का हाथ था.

जानकारी के लिए बता दें कि भीमा कोरेगांव हिंसा में मानवाधिकार कार्यकर्ता व वकील सुधा भारद्वाज, सामाजिक कार्यकर्ता वेरनॉन गोंजाल्विस, पी वरावरा राव, अरुण फरेरा और पत्रकार गौतम नवलखा शामिल के नाम शामिल हैं. इन सभी से पुलिस पुछताछ कर चुकी है और कई लोग तो जेल में हैं. वहीं सुधा भारद्वाज पिछले एक साल जेल में हैं. पिछले हफ्ते 6 सितम्बर को सुधा भारद्वाज ने बंबई उच्च न्यायालय को बताया था कि वह पूरे एक साल से जेल में हैं और पुणे पुलिस उनके खिलाफ कोई भी ठोस साक्ष्य पेश करने में विफल रही है.

भारद्वाज ने उच्च न्यायालय में जमानत अर्जी दायर की है

भारद्वाज ने उच्च न्यायालय में जमानत अर्जी दायर की थी. उनके वकील युग चौधरी ने न्यायमूर्ति सारंग कोतवाल को बताया कि पुलिस उनके खिलाफ मामले के लिए महज छह दस्तावेजों के भरोसे है, जिनमें से अधिकतर टाइप किए हुए पत्र हैं और उनमें से कुछ उनके नाम पर हैं. चौधरी ने दलील दी कि उनमें से कोई भी पत्र उनके द्वारा, उनके लिए नहीं लिखा गया है. यहां तक कि उनके कब्जे से भी नहीं मिला है इसलिए उनके आधार पर उन्हें जमानत दिए जाने से इनकार नहीं किया जा सकता.

नॉन गोंजाल्विस की जमानत याचिका पर 29 अगस्त को बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई हुई थी

वहीं, रनॉन गोंजाल्विस की जमानत याचिका पर पिछले महीने 29 अगस्त को बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई हुई थी. सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने वेरनॉन गोंजाल्विस से कई सवाल पूछे थे. ये सवाल टॉलस्टॉय की किताब 'वॉर एंड पीस' समेत कई आपत्तिनजक चीजों के उनके पास पाए जाने को लेकर थे. कोर्ट ने उनसे पूछा कि आखिर उनके पास ये सारी चीजें क्यों थीं?

तब कहा गया था कि कोर्ट में जज ने कहा कि आपके घर में ये किताब क्यों थी? बाद में इस खबर को लेकर सफाई आई कि जज ने जिस किताब का जिक्र किया था वो लियो टॉल्सटॉय की वॉर एंड पीस नहीं बल्कि विश्वजीत रॉय कि किताब वॉर एंड पीस इन जंगलमहल है. माओवाद पर आधारित इस किताब को लेकर जज ने आरोपी वेरनॉन गोंजाल्विस से सवाल पूछे थे.